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कल्याणकारी क्रिया

नमस्ते मित्रों !

 

कोरोना नाम के राक्षस ने वापस अपना सिर उठाया है। फिर पूरे देश में कोहराम मच गया है। जो परिस्थिति विषम है, उसमें मीडिया पेट्रोल छिड़कने का काम करता है और सब कुछ ज्यादा ही मुश्किल बनता जा रहा है। डर से सहमा हुआ है हर आदमी, चहुँ और भय का माहौल छाया हुआ है।

 

पर मेरे दोस्त। हिम्मत तो रखनी ही पड़ेगी। हिम्मत छोड़ने से काम चलने वाला नहीं है। हौसला रखिए, डरना नहीं है, सावधानी रखनी है, समाधान रखना है, आशावादी बनना है। जीवन की बागडोर सर्व समर्थ परमपिता प्रभु के हाथों में सौंपकर बड़ी सावधानी के साथ सब कुछ करना ही है। डरने से, कि कोरोना सिर्फ धुएँ से या हवा से ही फैलता है, ऐसा नहीं है, डरने से भी कोरोना बढ़ता है, और ज्यादा फैलता है।

 

देशभर में अन्य सभी गतिविधियाँ कम होने लगी हैं। घर से बाहर निकलना, घूमना, अन्य कार्य करना संभवत: टालना ही चाहिए और घर पर बैठकर सिर्फ यूँ ही समय व्यतीत नहीं करना चाहिए, किंतु कुछ न कुछ धार्मिक क्रिया में समय गुजारना चाहिए।

 

युवा मित्र ज्यादा देर तक हाथ पर हाथ रखे बैठ नहीं सकते, वो भागते हैं, दौड़ते हैं, उसे काम चाहिए, उसे कुछ न कुछ क्रिया करनी है। शरीर ऊर्जावान है, मन उल्लास से भरा हुआ है। दिल में अरमान है, आंखों में सपनों का सागर छलकता है। कुछ न कुछ कर देने को आतुर है प्राण…।

 

ऐसे सभी युवा मित्रों को सादर सलाम है। अपने उत्साह को ऐसे ही बनाए रखें, अपनी आशाओं को ऐसे ही जीवंत रखें, हमेशा कुछ न कुछ नया करने के लिए तैयार ही रहें।

 

पर इसके साथ एक बात याद रखें, कि हमेशा विवेक को जीवित रखें। जैसे, क्या खाना और क्या न खाना, इस विषय में भी विवेक होना चाहिए, वैसे ही क्या करना और क्या न करना, इस विषय में भी स्पष्ट विवेक होना चाहिए।

 

प्रभु महावीर कहते हैं कि, करो तो ऐसा करो, जिससे आपका भला हो और जनता का भी भला हो‌।

 

Q. आप कहेंगे कि अगर सभी का अच्छा हो ऐसे ही कार्य हमें करने है, तो फिर गुरुदेव हमें भगवान की पूजा करने को क्यों कहते है ? 

 

Q. क्या हमारी प्रभु पूजा से सभी का कल्याण होता है ?

 

Q. गुरु भगवंतो को वंदन करना हमें धर्म ने ही सिखाया है, पर क्या उससे सभी का कल्याण हो पाना संभव है ? मुमकिन है ?

 

इससे तो अच्छा यही है कि हम गरीबों की सेवा करें, जरूरतमंदों को दान दें, सभी की सहायता करें, यही क्रिया हमें करनी चाहिए।

 

तो मैं आपको बता दूँ, यह सब करने का प्रभु ने स्वयं कहा ही है। जीवदया और अनुकम्पा में जैन समाज हमेशा अग्रसर रहा है। आज पूरे देश में जितनी भी गौशालाएँ चल रही हैं, उनमें से सबसे ज्यादा जैन गौशाला- पांजरापोल है। मानवता की सेवा में जैनों का करोड़ों, अरबों रुपया खर्च होता है।

 

परन्तु हम जैन सिर्फ मानवता की सेवा में ही नहीं मानते, हम इतने से रुक नहीं जाते। हम चाहते हैं कि मानवता का उत्थान भी हो। हम ऐसी क्रिया करना चाहते हैं जिससे अपना और औरों का सिर्फ भला ही न हो, परंतु कल्याण भी हो।

 

और प्रभु पूजा, गुरु वंदन, त्याग, तपस्या, बड़ो की एवं गुरुओं की भक्ति वेयावच्च इत्यादि क्रियाओं से हमारा अपना व दूसरों का कल्याण होना निश्चित है।

 

इसीलिए कहूँगा, कि इस मुश्किल समय में हम भगवान द्वारा बताई हुई ढेर सारी क्रियाएँ करें, करते ही रहें। घर में प्रभु की प्रतिमा लाकर उनकी पूजा-अर्चना करें, तपस्या करें, गाथाओं का पाठ करें, सामायिक करें, प्रतिक्रमण करें। बार-बार ऐसे लॉकडाउन जैसे मौके नहीं मिलते। कोरोना की इस आफत को अवसर में बदल दें। क्योंकि हम तो बनिए हैं, पक्के व्यापारी..,।

 

॥ क्रिया पद ॥

 

(है प्रीत जहाँ की रीत सदा…)

 

 

तीर्थंकर ने जो कही है क्रिया, मैं उसका पालन करता हूँ,

मेरे अंतर के दोषों का मैं ऐसे गालन करता हूँ…

 

 

आत्मा पर कितने बरसों के कर्मों का भार इकट्ठा है,

घुसपैठी दोष की जोरतलब बेचारा जीव निहत्था है,

किरिया शस्त्रों को सजधज मैं उन कर्मों से ना डरता हूँ… मेरे…॥1॥

 

 

जो मार्ग बताया जिनवर ने, वो सक्षम है बलशाली है,

जो किरिया से मुँह मोड़े उनका आत्म खजाना खाली है,

है नेक सही यह मार्ग, पथिक मैं उस पर हरदम चलता हूँ… मेरे…॥2॥

 

 

गुण प्रगट आती है किरिया पाए गुण में स्थिरता देती है,

और गुण पाकर जो चूक गया, उसको भी ऊपर लेती हैं,

मैं क्रिया राह का राही बन जनपद को निश्चित करता हूँ… मेरे…॥3॥

About the Author /

authors@faithbook.in

शास्त्रबोध, संवेदनशीलता और शीघ्र-कवित्व का व्यक्तित्व धारण करने वाले मुनिवर ने, भगवान बनने का राजमार्ग, अर्थात् वीसस्थानक पर नूतन काव्यों की रचना की और साथ उनकी ऐसी विवेचना की जो युवा हृदय को छू सके।

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