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परिवार ही सुरक्षा

(5) Liberty : Family शब्द का पांचवां अक्षर है L, और यहाँ L stands for Liberty, यानी स्वातंत्र्य, फ्रीडम। लिबर्टी दो प्रकार की होती है, हितकारक और अहितकारक। हितकारक लिबर्टी ही यथार्थ में लिबर्टी है, अहितकारी लिबर्टी वास्तव में गुलामी है।

 

बेटे या बेटी को जो कपड़े पहनने हो, वैसा पहनने की छूट देना, उसे स्मार्ट फोन और एक्टिवा दिलवाना, उसे जितना चाहिए उतने पैसे दे देना, उसे वीभत्स कपड़ों में वासना के भूखे भेड़ियों के बीच पढ़ने (?) भेजना, उसे अपनी मर्जी से जीवनसाथी (या मृत्यु-साथी) पसन्द करने देना, ये सब अहितकारी लिबर्टी है।

 

कितनी बेटियों को मुस्लिम युवक अपने जाल में फंसाते हैं, इसके पीछे अहितकारक लिबर्टी ही कारणभूत है। नवरात्रि के तीन महीनों में लाखों शिशु पेट में ख़त्म कर दिए जाते हैं इसके पीछे अहितकारक लिबर्टी ही कारण है। आपके घर में प्याज-लहसुन खाने वाली बहु आ जाए, और धीरे-धीरे पूरे घर का धर्मान्तरण हो जाए, इसके मूल में अहितकारक लिबर्टी ही है। आपके वर्षीतप, ओली और लाखों का दान कहीं ख़त्म हो जाए और आप किसी को मुँह दिखाने लायक न रहो, इसके पीछे अहितकारक लिबर्टी ही है। पत्नी पीहर जाकर बैठ जाए, और सन्तान आपके होते हुए अनाथ हो जाए इसके पीछे अहितकारक लिबर्टी ही है। आपके फ्रिज में वाइन की बोतल आ जाए, आपके घर के ड्रावर में लॉक लग जाए, आपके सन्तानों की लाइफ में प्राइवेसी आ जाए, आपकी रातों की नीन्द उड़ जाए, आपको डायबिटीज़ हो जाए, आपकी श्वास रुक-रुक कर चले, इन सबके मूल में अहितकारक लिबर्टी के सिवा और कुछ नहीं।

 

एक घर में बेटी ने बगावत की, “आप सबने मुझ पर बन्धनों का बोझ डाल दिया है, मुझे फ्रीडम चाहिए। जब सबको फ्रीडम है, तो मुझे क्यों नहीं?” घर के सब लोग स्तब्ध थे। बेटी ऐसी बात बोलेगी, ऐसा किसी को अन्दाज भी नहीं था। सब उसके पप्पा के सामने देखने लगे, पिता ने अत्यन्त प्रेम और शान्ति के साथ कहा, “बेटा ! जिससे तेरा भला हो, ऐसी सारी फ्रीडम तुझे पहले से मिली है, अब तू ही बोल, तुझे और कौनसी फ्रीडम चाहिए?” बेटी क्षण भर के लिए विचार में डूब गई, पप्पा की बात का मर्म उसे समझ आया, वह रोने लगी और पिता को सॉरी बोलकर उनके पैरों में गिरकर अन्दर चली गई।

 

आपको अपनी फैमिली बचानी है? तो सबसे पहले अपने जीवन की सारी अहितकारी लिबर्टी को दूर करो। अपनी फैमिली में ऐसा वातावरण खड़ा करो कि उनकी लाइफ में ऐसी लिबर्टी की छाया भी न पड़े। आपकी फैमिली ऐसी लिबर्टी की माँग तो दूर, बल्कि सामने से इसका विरोध करने वाली बन जाए।

 

दुनिया के साथ-साथ सत्यानाश के रस्ते पर गिरने के बजाय आप फ्रीली, अपने तरीके से विचार कर सको, भेड़ों के टोले से बाहर आ सको, यही सच्ची लिबर्टी है। जहाँ वाइन पिलाई जाए ऐसी पार्टी में जाने की कोई मज़बूरी न हो, यही सच्ची लिबर्टी है। आपका ग्रुप यदि गलत कार्य करता हो लेकिन उसमें आपको शामिल करने की किसी की ताकत न हो, यही सच्ची लिबर्टी है। संस्कार और कल्याण के मार्ग पर चलने में आपको कोई भी या किसी की भी शर्म आड़े न आए यही सच्ची लिबर्टी है। किसी भी एन्वायरमेंट आप अपना धर्म निखालसता से पालन कर सको, यही सच्ची लिबर्टी है।

बाकी, कहने वाली फ्रीडम का अर्थ तो मानवता छोड़कर पशु बनने की फ्रीडम जैसा ही है।

 

(6) Yummy : Family शब्द का छठा अक्षर है Y, और यहाँ Y stands for Yummy. जो स्वादिष्ट हो, मजेदार हो, आनन्ददायक हो उसे yummy कहते हैं। शुरुआती पांच घटकों को जब आप प्राप्त कर चुके होंगे, तो वास्तव में पारिवारिक स्वस्थता और जीवन के वास्तविक आनन्द का लुत्फ़ उठा पाएँगे।

 

परम तारक, परम श्रद्धेय श्री जिनाज्ञा विरुद्ध कुछ लिखा हो तो मिच्छा मि दुक्कडम्

 

( जिनशासन के जुझारू सैनिक जैसे परम विद्वान अंतर्मुखी गणिवर श्री ने Faithbook Knowledge Book में परिवार की व्याख्या को विस्तृत स्वरूप से व्याख्यायित किया है। “ Faithbook “ पूज्यश्री का सदैव ऋणी रहेगा। पाठकों के लिए यह भी एक खुशखबरी है कि पूज्यश्री के लेख आगामी अंको में भी प्रकाशित होते रहेंगे। बस, आप तैयार रहें पूज्यश्री के उच्च विचारों को पढ़ने के लिए…! )

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जिन्होंने अनेक धर्म-सम्प्रदायों के ग्रन्थ एवं पुस्तकों का गहन अध्ययन किया, और वर्तमान के विद्वानों में जो पहली पंक्ति में बैठते, ऐसे तीव्र मेधावी मुनिवर की विविध विषयों की यह लेखमाला मात्र प्रौढ़ या प्रबुद्ध वर्ग को ही नहीं बल्कि युवाओं को भी आकर्षित करेगी।Life को Change करने वाले लेख जीवन को नई दिशा देंगे।

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