Happy Father’s Day

स्नेह, सत्व और सहिष्णुता का संगम : पिता

माता-पिता के प्रेम का मूल्यांकन करना हमारे बस की बात नहीं है। जिस प्रकार हमारी दोनों आँखों का महत्त्व एक समान है, उसी प्रकार माता और पिता की महिमा भी एक सरीखी है, इसमें तुलना करना सम्भव नहीं है।

 

माता की तरह पिता भी हमें बहुत प्रेम करते हैं। माता का प्रेम मिठाई जैसा होता है, तो पिता का प्रेम रेपर में पैक किए गिफ्ट जैसा होता है, उसे खोलने के बाद ही पता चलता है, कि हमें क्या मिला?

 

माता की गोद उपवन जैसी है, तो पिता का कन्धा स्कूल जैसा है।

 

माता की गोद कुल की परम्परा सिखाती है, तो पिता का कन्धा स्वाभिमान सिखाता है।

 

माता की गोद में प्रेम मिलता है, तो पिता के कन्धे पर  सुकून मिलता है।

 

माता हमें हृदय से लगाती है, तो पिता हमें पीठ पर बिठाते हैं।

 

माता हमें जीवन देती है, तो पिता हमें जीना सिखाते हैं।

 

माता हमें चरण देती है, तो पिता हमें चलना सिखाते हैं।

 

माता हमें जमाने की नजरों से बचाती है, तो पिता हमें सहनशीलता सिखाते हैं।

 

माता हमारा अस्तित्व है, तो पिता हमारे अस्तित्व की पहचान है।

 

माता और पिता की अपनी-अपनी मौलिक विशेषताएँ हैं। सन्तान अपने नाम के पीछे पिता का नाम जोड़ते हैं, और गर्व महसूस करते हैं, कि मैं इनकी सन्तान हूँ। पिता इस संसार से चले भी गए हों, फिर भी पिता का नाम इतना शक्तिशाली होता है कि जिस पर पुत्र गौरव के साथ मस्तक उठाकर चल सकता है।

 

सेठ आणंदजी कल्याणजी पेढ़ी के प्रमुख का पद सेठ शान्तिदास झवेरी के वारिस के हाथों में आता रहा है। जब – जब नए प्रमुख ने जैसे ही पद भार सम्भाला, तो वे भी अपने पूर्वजों की गौरव गाथा गाते नहीं थके।

 

जैसे ‘मातृत्व’ की ‘महिमा’ होती है, वैसे ही ‘पितृत्व’ का ‘गौरव’ होता है। मात्र पुत्र ही नहीं बेटियाँ भी पिता से गौरवमयी हुई हैं। द्रुपद राजा से द्रौपदी, जनक राजा से जानकी आदि।

 

माता का ‘म’ अर्थात् ममता, और पिता का ‘प’ अर्थात् प्रेम; और पिता का यह प्रेम कभी-कभी तो माँ की ममता से भी आगे बढ़ जाता है।

 

रानी चेल्लणा ने पुत्र को जन्म दिया, लेकिन गर्भकाल में अशुभ मनोरथ उत्पन्न होने के कारण उसे जन्म के तुरन्त बाद ही दासी के हाथों कचरे में फिकवा दिया। लेकिन पिता श्रेणिक राजा ने स्वयं कचरे के ढेर से अपने रोते हुए पुत्र को उठा लिया। बच्चे के हाथ की उंगली मुर्गे द्वारा उठाए जाने पर उसमें से खून और मवाद निकल रहा था, फिर भी उसे चूस कर उसकी पीड़ा शान्त करने का प्रयास किया।

 

उसी पुत्र कोणिक ने बड़े होने पर सत्ता की लालच में अपने पिता श्रेणिक को जेल में डाल दिया। एक बार माता के मुख, उसने जब अपने बचपन का यह वाकया सुना तो उसे अपनी भूल महसूस हुई। पिता को जेल से छुड़ाने के लिए भागा, चाबी नहीं मिली तो मोटा हथौड़ा लेकर गया।

 

पुत्र के हाथ में हथौड़ा देखा, तो पिता श्रेणिक ने सोचा, “ये तो मुझे आज मारने आ रहा है, वैसे भी मैं तो बूढ़ा हो चुका हूँ, आज नहीं तो कल मरने ही वाला हूँ, तो मेरे बेटे के सर पर ‘पितृ-हत्या’ का कलंक क्यों लगने दूं ?” यह सोचकर श्रेणिक ने अपने हाथ में पहनी जहरीली अंगूठी चूसकर मृत्यु का वरण किया।

 

एक बार अपने पुत्र की अंगुली चूसकर, और दूसरी बार अपनी विषैली अंगूठी चूसकर श्रेणिक राजा ने उच्च कोटि का पितृ-प्रेम का सन्देश दिया।

 

धर्म जगत का भी एक दृष्टान्त है, आचार्य श्री शय्यंभवसूरि ने अपने पुत्र मुनि मनक के आत्मकल्याण के लिए १४ पूर्वों में से चुनिन्दा श्लोक लेकर ‘श्री दशवैकालिक सूत्र’ की रचना की, और यह साबित किया कि पिता के हृदय में भी लबालब प्रेम भरा होता है।

 

पिता के लिए अंग्रेजी में FATHER शब्द दिया गया है। तो आइए, इसके एक-एक Letter से पिता को समझने का प्रयास करें :

  • F – Friend

हमारे साथ खेलने बैठते हैं, और फिर झूठे-झूठे हार जाते हैं, और हमें जीत दिलाकर खुश हो जाते हैं। हमारी उम्र के न होने पर भी वे हमारे साथ खेलते हैं, मजाक-मस्ती करते हैं, और फिर कहते हैं ‘रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं।’

पिता के संग मित्रता के साथ आनन्दपूर्वक बिताए हुए वो दिन जब याद आते हैं तो हमारे चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

याद आता है, कि जब पिता रसोई बनाए तो मम्मी के हाथ के खाने से उसकी तुलना करके तारीफ (?) करने का मजा ही कुछ और होता था। और यह Friendly मस्ती तो पूरे जीवन की यादगार पल बन जाती है।

  • A – Anchor

पिता की उपस्थिति में सुरक्षा अनुभव होती है। छोटे-छोटे कष्ट तो माँ ठीक कर देगी, इस बात का हमें भरोसा होता है, इसीलिए छोटी चोट लगते ही ‘ओ माँ’ ऐसे शब्द निकलते हैं। लेकिन यदि अचानक दुःखों का पहाड़ टूट पड़े तो ‘अरे ! बाप रे’ बोलते हुए हमें पिता ही याद आते हैं।

पिता उंगली पकड़े बच्चों का सहारा है, पिता कभी खट्टा तो कभी खारा है।

पिता से ही बच्चों के ढेर से सपने हैं, पिता है तो बाजार के सब खिलौने अपने हैं।

पिता सुरक्षा है, अगर जिस पर हाथ है, पिता नहीं तो बचपन अनाथ है।

  • T – Teacher 

राजा ऋषभ स्वयं शिक्षक बनकर अपनी प्यारी दोनों बेटियों को पाठ सिखाते थे। पहली बेटी ‘ब्राह्मी’ को लिपि का ज्ञान दिया, और फिर लिपि का नामकरण भी बेटी के नाम से किया। दूसरी बेटी ‘सुन्दरी’ को गणित का ज्ञान दिया।

इस अवसर्पिणी में पढ़ाने का पहला जिम्मा माता ने नहीं, वरन् पिता ने उठाया था। क्योंकि पिता में शिक्षक जैसी सख्ती होती है, जो माता में नहीं होती। मम्मी हमें १०० बार बोलें कि ‘पढ़ने बैठ जा, Homework कर ले’, लेकिन हम नहीं सुनते, और खेलने में व्यस्त रहते हैं। लेकिन जैसे ही पता चले कि पिता के आने का समय हो गया है, तो तुरन्त बैग खुल जाता है, फटाफट books निकलने लगती हैं, मानो हमसे ज्यादा समझदार कोई है ही नहीं। और चुपचाप हम पढ़ाई करने बैठ जाते हैं।

पिता ज्यादा कुछ बोलते नहीं, लेकिन जब बोलते हैं, तो हमारे मुँह से जवाब नहीं निकल पाता। पिता सिर्फ इतना ही कहते हैं, “क्यों? क्या हुआ?” बस इतने में तो Pindrop Silence हो जाता है। मम्मी से तो चाहे जैसे बात कर लेते हैं, लेकिन पिता के सामने बात करते हुए अपने आप ही आँखें झुक जाती है। मम्मी के साथ तो लम्बी-लम्बी बातें चलती हैं, लेकिन पिता के साथ, सिर्फ औपचारिक बातें ही हो पाती है। मम्मी के साथ”  तूं – ता “ से बातें हो सकती है मगर पापा से बातें करते वक्त “ आप “ अपने आप आ जाता है। क्योंकि बाप, बाप होता है।

  • H – Hero

‘मेरे पापा की Driving एकदम मस्त है’, ‘मेरे पापा Shave करते हैं, तो मैं उनको ही देखता रह जाता हूँ’, ‘मेरे पापा तो आधे घण्टे तक Swimming कर सकते हैं’ – अपने पिता की ‘हीरोपंती’ बताने वाले ऐसे अनेक संवाद बच्चों के मुँह से हम सुनते रहते हैं। क्योंकि सन्तान का Super Hero उसका अपना पिता ही होता है।

  • E – Encouragement

पिता घर की जरूरतें और हमारे शौक पूरा करने में समय का भान भूल जाते हैं। और फिर बूढ़े हो चुके उस बाप से हम सवाल करते हैं, ‘आपने हमारे लिए किया ही क्या है?’

पिता अपने सपनों के लिए नहीं, बल्कि हमारे सपनों के लिए जीते हैं, उन्हें साकार करने के लिए सख्त मेहनत करते हैं, साथ ही हमें भी अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देते हैं।

हमारे प्रोत्साहन का Power House हमारे पिता ही हैं। कितनी भी निराशा या हताशा हो, वे हमारे साथ मजबूती के साथ खड़े रहकर हमारा मनोबल बढ़ाते हैं।

  • Role Model 

बालक हमेशा अपने पिता के जीवन की Videography करता है, पिता जो काम जिस प्रकार करते हैं, बच्चा उस Style की Copy करके अपने आप को महान समझता है। बालक के लिए पिता से बढ़कर और कोई आदर्श नहीं होता।

My father didn’t told me how to live.

He lived, and let me watch him doing it.

 

Last Seen :

Fathers are just a male version of mothers.

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जिनके प्रवचन और शिविरों में भाग लेने के लिए युवावर्ग दौड़ा चला आता है, साथ काव्य सृजन और लेखन में जिनकी लेखनी सुप्रसिद्ध है, ऐसे मुनिवर के विविध लेख युवाओं की पहली पसन्द बनेंगे, ऐसी श्रद्धा है।

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