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The Faithbook Blog

वस्तु की खोट?
लगत पिया कह्यो माहरो रे, अशुभ तुम्हारे चित्त; पण मोथी न रहाय पिया रे, कहा बिना सुण मित्त। …03 प्रिय! मेरी बात तुम्हें अच्छी नहीं लग रही...
Priyam
Apr 19, 20236 min read
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प्रभु का आध्यात्मिक जन्म
माता के गर्भ से निष्क्रमण होना जन्म कहलाता है, पर चेतना का शरीर में से निष्क्रमण होना जागरण कहलाता है। जन्म से पूर्व ही जागरण की धारा में...
Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Apr 11, 20212 min read
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प्रयोजनशून्यता ही पूर्णता है।
प्रभु गर्भ में भी पूर्णजागृत थे। गर्भ सृजन का स्थान है, सृजन शरीर का होता है। प्रभु सृजन से परे हैं। जो नजदीक है, इतना पास कि आप उसे पास...
Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Apr 10, 20212 min read
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सर्वस्वीकार की साधना
माता त्रिशला के हृदय की संवेदना इतनी गहरी थी, उनका पुत्र-राग इतना था, कि पुत्र-वियोग आयुष्य को उपक्रांत कर सकता था…। प्रभु खुद को...
Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Apr 10, 20212 min read
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विशुद्धि चक्र ध्यान
( क्रमांक 1 से 6 तक मूलाधार चक्र ध्यान के मुताबिक ध्यान करने के पश्चात ) फिर विचार कीजिए कि दूर क्षितिज से गहरे नीले, Grey या Navy Blue...
Panyas Shri Shatrunjay Vijayji Maharaj Saheb
Nov 11, 20205 min read
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स्वाधिष्ठान चक्र ध्यान
( मूलाधार चक्र ध्यान की प्रक्रिया में से 1 से 6 क्रमांक तक ध्यान करने के पश्चात ) 7. फिर विचार कीजिए कि दूर क्षितिज से केशरी रंग की कोई...
Panyas Shri Shatrunjay Vijayji Maharaj Saheb
Jul 27, 20205 min read
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आत्मजागृति का अखंड दीप
प्रभु महावीर आतमजागृति का अखंड दीप है। प्रभु महावीर का अर्थ होता है औरों से अन छुआ निजत्व। प्रभु महावीर का मतलब है जिनको किसी से भी मतलब...
Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Jul 27, 20203 min read
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सत्य ध्रुव है
प्रभु महावीर ‘सत्’ को जीने वाले थे। ‘सत्’ उनका जीवन-दर्शन था। सत् का अर्थ है सत्य, और सत्य का अर्थ है ध्रुव। जो ध्रुव नहीं है, वह...
Panyas Shri Labdhivallabh Vijayji Maharaj Saheb
Jun 21, 20205 min read
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मूलाधार चक्र ध्यान
सबसे पहले शान्त चित्त होकर पद्मासन या सुखासन में बैठें। फिर तीन मिनिट तक अनुलोम-विलोम करें। इसमें दाहिने हाथ के अँगूठे से दाहिनी नासिका...
Panyas Shri Shatrunjay Vijayji Maharaj Saheb
Jun 21, 20206 min read
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