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The Faithbook Blog


ईश्वर ने विश्व को बनाया है या बताया है ?
सृष्टि के सृजन के विषय में आधुनिक विज्ञान द्वारा प्रस्तुत Big Bang थिअरी आदि के विषय में तर्कसंगत उत्तर से रहित ढ़ेरों प्रश्न बिना सुलझे...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Apr 5, 20247 min read
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हमारे धर्म के नियम बहुत ही सख्त हैं, ऐसा क्यों?
प्रश्न : महाराज साहेब! अनेक प्रश्नों का समाधान हो गया हैं। अब एक नया प्रश्न है कि, दुनिया में सैकड़ों धर्म हैं। हर एक धर्म में कुछ ना कुछ...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Apr 19, 20237 min read
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कंदमूल अभक्ष्य क्यों है?
प्रश्न : महाराज साहब! कंदमूल अभक्ष्य क्यों है? उत्तर : जमीनकंद के भक्षण से आत्मा को दुर्गतिगमन आदि नुकसान होता है। ऐसा भगवान ने अपने...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Apr 10, 20237 min read
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क्या देवद्रव्य की राशि का उपयोग साधर्मिक के उत्थान में नहीं करना चाहिए?
प्रश्न: हमारे यहाँ चढ़ावा आदि पैसों में क्यों बोले जाते हैं? इत्यादि बातें आपने सुंदर तरह से तर्कसहित समझाईं और वे समझ में भी आ गईं।...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Feb 28, 20227 min read
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चढ़ावा पैसों के आधार पर ही क्यों बोला जाता है ?
प्रश्न : हमारे यहाँ पैसों का बहुत बोलबाला है। प्रभु की प्रतिष्ठा है, तो चढ़ावा बोलो कि पहली पूजा कौन करेगा? मुमुक्षु को विदाई तिलक करना...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Dec 12, 20217 min read
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अनीति से पैसा मिलता है या पुण्य से?
अनीति से अंतराय बँधता है यह जिनोक्त बात हमने पिछले लेख में बैंक के दृष्टांत से देखी। इस लेख में हम इसे शास्त्रीय तर्क के द्वारा देखेंगे।...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Oct 31, 20218 min read
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धर्मात्मा दुःखी और पापी सुखी, ऐसा क्यों ?
इस भव में लोन या ब्याज कुछ भी वापस नहीं करना है, लेकिन परलोक में आना, पाई, ब्याज, सिक्के समेत चुकाना पड़ेगा। ऐसा करार करने वालों को बिना...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
May 18, 20217 min read
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अजीबों-गरीब और विचित्र scheme
जिसे जितनी लोन चाहिए उतनी ले जाइये, किसी भी पहचान पत्र या दस्तावेज आदि की जरूरत नहीं है। इस भव में ना तो रकम वापस करनी है, ना ही ब्याज...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Apr 11, 20217 min read
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जीवन की बारहखड़ी
पिछले लेख में हम अनीति को टालने की बातों के बारे में सोच रहे थे। अनीति के विषय में एक अन्यधर्मी मेगेज़ीन में पढ़ी हुई कथा याद आ रही है।...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Apr 11, 20217 min read
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फर्ज अदा करें वरना कर्ज चढ़ जाएगा।
पिछले लेख के अंतर्गत आखिर में यह प्रश्न किया गया था कि नौकरी करने वालों के लिए नीति और प्रामाणिकता क्या होती है? इसका उत्तर यह है कि उसको...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Apr 11, 20217 min read
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जीव बिना सुख के नहीं रह सकता है।
हमने पिछले लेख में देखा था कि कोई भी व्यक्ति, वस्तु या प्रवृत्ति जीव को सुख नहीं दे सकती, ना ही दे रही है, बल्कि जीव का खुद का रस ही खुद...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Apr 11, 20216 min read
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मनोरंजन का मानसरोवर
एक बार के लिए मानिए कि आपकी वार्षिक आमदनी 10 लाख रूपये है, और पूरे वर्ष का कुल खर्च 8 लाख रूपये है। मतलब 2 लाख रूपये की शुद्ध बचत है।...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Jan 31, 20216 min read
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दुष्प्रवृत्तियों में हमें बदबू का अहसास क्यों नहीं होता?
एक्स्ट्रा प्लॉट में कचरा एकत्र हो गया हो तो उसकी बुरी असर बंगले पर होती हुई स्पष्ट दिखाई देती है। रोज मिलने वाले दो-चार घण्टे के खाली समय...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Nov 2, 20207 min read
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इंद्रियों के गुलाम या मालिक ?
ऐसे पुण्यशाली जीव जिन्हें रोज दो-चार घण्टे का Extra Time मिलता है, उन्हें उस Extra Time में धर्म की वृद्धि करनी चाहिए – गुरु भगवन्त ऐसा...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Sep 23, 20207 min read
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How to use this extra time?
पिछले लेखों में आपने पढ़ा, कि यदि आप पुण्य-शाली हैं और दिन में 3-4 घण्टे काम करके जरूरत से कहीं अधिक कमा लेते हैं, तो आपको बाकी के समय में...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Sep 23, 20206 min read
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जिनशासन में अर्थ और काम पुरुषार्थ का स्वरूप क्या है ?
इस लेखमाला के प्रथम भाग में मार्गानुसारी के 35 गुणों में से पहले गुण ‘त्रिवर्गअबाधा’ का उल्लेख किया था। उसका अर्थ यह था कि...
Aacharya Shri Abhayshekhar Suriji Maharaj Saheb
Jun 30, 20207 min read
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From the significance of daily rituals to the profound teachings of Jainism,
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