एक नगर के मुख्य राजमार्ग पर एक सुंदर बंगला था। सुबह की खिलती उषा में किसी ने उस बंगले का दरवाजा खटखटाया। घर के मालिक ने दरवाजा खोलकर देखा, तो सामने मुस्कुराते हुए एक सज्जन खड़े थे।   सज्जन ने कहा, “मुझे रहने के लिए घर चाहिए।...

• छगन वकील ने जज को कानून की किताब दी, और कहा, “इस पुस्तक के पंद्रहवें पेज के आधार से आरोपी को निर्दोष मुक्त कर देना चाहिए।” जज ने पंद्रहवा पन्ना खोल कर देखा। उसमें से 500 की पांच नोट निकली।   जज ने पैसे जेब में...

|| श्री कलिङ्गजिनायार्षभये नमः ||   भगवान महावीर स्वामी के परिनिर्वाण के बाद २७० साल से लेकर ३३० साल की एक भव्य कालखंड की ऐतिहासिक गाथा यहाँ पर पेश होने जा रही है। भारत के महान साम्राज्य मौर्या साम्राज्य का अंतिम सितारा सम्राट संप्रति अस्त हो रहा...

सृष्टि के सृजन के विषय में आधुनिक विज्ञान द्वारा प्रस्तुत Big Bang थिअरी आदि के विषय में तर्कसंगत उत्तर से रहित ढ़ेरों प्रश्न बिना सुलझे खड़े हैं। इसीलिए विज्ञान भी नई-नई कल्पनाओं के आधार पर अपने निष्कर्ष बदलता रहता है। यानी कि विवक्षित विस्फोट होकर...

प्राकृतिक चिकित्सालय के अग्रणी श्री लुई कुने ने अपनी पुस्तक ‘आकृति से रोग की पहचान’ में संध्याकालीन भोजन के विषय में विचार प्रगट किए है, जो माननीय हैं।   प्रायः कहा जाता जब जब भूख लगे तब तब भोजन करना चाहिए, किन्तु यह एक प्रकार की पराधीनता...

राजा हस्तिपाल की दानशाला में बारह पर्षदाएँ विराजमान थीं। अमावस्या की रात्रि थी, सर्वत्र नीरव शांति थी। प्रभु वीर  जगत के कल्याण के लिए सोलह कलाओं से खिलकर भव्य जीवों को उपदेश दे रहे थे।   दुःखविपाक सूत्र के चतुर्थ अध्ययन का प्रभु ने प्रारंभ किया।   इस जंबूद्वीप...

अमावस्या की मध्यरात्रि बीत चुकी थी। राजा हस्तिपाल की दानशाला में विराजमान प्रभुवीर ने विपाकसूत्र के पाप विपाक के तीसरे अध्ययन का आरंभ किया।   पुरिमताल नामक नगर था। नगर के ईशान भाग    में अमोघदर्शी नामक एक सुंदर उद्यान था। उस उद्यान के एक कोने में अमोघदर्शी नामक...

दिव्यध्वनि से ध्वजारोहण     वि.सं. 1515 (ई.स. 1459) का वर्ष था। शिखर का कार्य पूर्ण होने को था। अब काजलशा परिवार में कर्ता पुरुष होने के कारण कामकाज पर पूरा ध्यान दे रहा था।   मृगादेवी की सहमति लेकर काजलशा ने दंड-ध्वजा के लिए उत्तम मुहूर्त देखा। शुभ मुहूर्त...

काजलशा का काला कलेजा      जिनमन्दिर के निर्माण में मात्र पत्थर ही नहीं लग रहे थे, बल्कि मेघाशा के मनोरथ भी लग रहे थे। प्रभु के आगमन से गोड़ी गाँव अब गोड़ीपुर बनने लगा था। यह गाँव अब किसी बड़े नगर जैसा सुशोभित दिखाई देने लगा था।...

  मेरे प्रभु पारसनाथ   आंगन में कल्पवृक्ष पल्लवित होने पर जितना आनन्द प्राप्त नहीं होता, उतना आनन्द आज मेघाशा के हृदय में था। जब से पार्श्वनाथ प्रभु गृहांगन में विराजित हुए, तब से मेघाशा का मन-मयूर प्रसन्नता से नृत्य कर रहा था। वह प्रतिदिन प्रभुभक्ति के रंग...

इंद्र विमान जैसा रथ राजमहल के प्रांगण में तैयार खड़ा हुआ था। धूमधाम से तैयारी चल रही थी। सद्गुरु के आगमन के समाचार राजा को मिलने के बाद एक अजीब-सा रोमांच अनुभव हो रहा था।    यह रोमांस और किसी का नहीं, पर अपनी अदम्य जिज्ञाशा के...

(मंत्री मित्रानन्द शव के द्वारा कहे गए वचनों को भूल नहीं सकते थे, इसलिए राजा से मौंन अनुमति लेकर पाटलिपुत्र छोड़कर कहीं और चले गए। तत्पश्चात आगे क्या होता है पढ़िए…।)   दुर्गंध मारते हुए शवों से भी ज्यादा गंदी दुर्गंध चारों ओर से आ रही थी।...

एक स्त्री अत्यंत क्रोधी स्वभाव वाली थी। दिन और रात, घर में और बाहर हर जगह गुस्सा करती थी। अपनी सास पर, ससुर पर, पति पर, बच्चों पर, नौकरों पर गुस्सा करती थी। उसे भी मालूम था कि, मैं जो कर रही हूँ वह योग्य...

एक नौजवान नाविक की नाव में एक श्रीमंत सेठ सफर कर रहे थे। जब नाव बीच मझधार में पहुँची, तो भयंकर तूफान आया। नाव आकाश में हवा में उछलने लगी। सेठ तो बुरी तरह से डर गये, उन्हें तो अपनी नजरों के समक्ष यमराज दिखने लगे।...

घर अपने वालम कहो रे, कौण वस्तु नी खोट?   यदि आपको अपने घर में सोना ही सोना दिखाई दे, और दुनियाभर में धूल ही धूल दिखाई दे, तब समझ लेना कि अब आपको सत्य दिखाई देने लगा है।    रोज के अरबों की कमाई करने वाले उद्योगपति, और...

चलो, आज भगवान बनने का अंतिम कदम भी भर लेते हैं । जिसका नाम है - तीर्थ पद।   दो चीजें सबसे महत्त्वपूर्ण होती हैं, एक जो सबसे पहली हो, और दूसरी जो सबसे अंतिम हो।   दो बातें सबसे महत्त्वपूर्ण होती हैं, एक जो सबसे पहले कही गई...

प्रणाम मित्रों!   परमात्मा बनने के 20 Steps की हम बात कर रहे हैं। इस लेख की शुरूआत में आपको जरूर कुछ नया लगा होगा।   हर बार ‘Hello Friends’ कहकर शुरू होने वाली अपनी बात आज ‘प्रणाम’ शब्द के साथ प्रारंभ हुई है।   चूँकि आज की बात ‘अभिनव ज्ञान’...

प्रश्न :  महाराज साहेब! अनेक प्रश्नों का समाधान हो गया हैं। अब एक नया प्रश्न है कि, दुनिया में सैकड़ों धर्म हैं। हर एक धर्म में कुछ ना कुछ rules and regulations होते ही है। पर अन्य किसी भी धर्म की अपेक्षा हमारे धर्म के नियम...

चढ़ावे पैसों में ही क्यों लिए जाते हैं? देवद्रव्य का उपयोग अन्य किसी भी कार्य में क्यों नहीं हो सकता? आदि बातें अब बराबर से समझ में आ गईं हैं। अब प्रश्न है कि, इतने सारे देरासरों की क्या जरूरत है?   उत्तर : बाघ और सिंह...

रोगों का घर : रेफ्रिजरेटर   आजकल रेफ्रिजरेटर फैशन और इज्जत का साधन बन गया है। परन्‍तु वास्तव में तो यह रोगों का ही घर है। गुजराती साप्ताहिक 'अभियान' में डॉ. श्याम वैद ने इस विषय में विस्तृत प्रकाश डाला है, जो यहाँ संक्षिप्त में साभार उद्धृत...

मानव जीवन का उद्देश्य तो अनाहारी पद प्राप्त करने का है। परन्तु यह तब तक नहीं हो सकता, जब तक अधिक अहिंसा का पालन हों। सात्त्विक जीवन जीने के लिए आहार में विवेक आवश्यक हैं। अन्नाहारी या शाकाहारी जीवन में करुणा है, दया का झरना...

वनस्पति आहार की श्रेष्ठता   मनुष्य के लिए मांसाहार की अपेक्षा अधिक प्राकृतिक आहार है।  शाकाहार से सहन शक्ति बढ़ती है।  आरोग्य की वृद्धि के लिए भी यह मांसाहार से अधिक अच्छा है।  यह मांसाहार के समान अपवित्र और रोग वर्धक नहीं है।  क्षार विटामिन तथा...

सुनी सुमता की विनती रे, चिदानंद महाराज।  कुमता नेह निवार के प्यारे, लीनो शिवपुर राज॥   सुमता की विनती सुनकर चिदानंद महाराज ने कुमता के प्रति अपना स्नेह छोड़ा और शिवपुर का राज पा लिया।   शोभनो मोक्षानुकूलतयाऽऽत्महितप्रयोजकत्वेन सुन्दरो मतो यस्या: सा सुमता।   जिसका मत सुंदर है, वह सुमता है। सुंदर...

मेघाशा का महाप्रयाण   सुव्रता के विवाह की शहनाई बज रही थीं, ढोल बज रहे थे। काजलशा ने अत्यन्त धूमधाम से विवाह करवाया। ऐसा आयोजन देखकर स्नेही-स्वजन प्रशंसा करते हुए थक नहीं रहे थे। पुत्री के लिए पिता का प्रेम लोगों को दिखाई दे रहा था।   इस प्रसंग...

बैंकों में देवद्रव्य के करोड़ों रूपये ऐसे ही निष्क्रिय पड़े रहते हैं, तो उसका उपयोग दुष्काल राहत में, या भूकंप पीड़ितों के लिए, या अनाथ बच्चों के लिए, या गरीबों के एजुकेशन के लिए, या गरीबों को मेडिकल सहायता के लिए नहीं करना चाहिये? मतलब,...

                                      मांसाहारी और शाकाहारी में अंतर    मांसाहारी पशु के लक्षण शाकाहारी मनुष्य के लक्षण 1.   दूसरों को फाड़ डालने के लिए टेढ़ेऔर वज्र समान तेज नख। 1.      मनुष्य के नख वैसे...

एक सप्ताह पहले ही शादी किया हुआ एक युवक एक ज्योतिषी के पास गया, और अपनी कुंडली बताकर पूछने लगा कि, “मेरा वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा?”   कुंडली देखकर ज्योतिषी बोला, “शुरू के 3 वर्ष तकलीफ है।“   युवक ने फिर पूछा, “3 वर्ष के बाद तो कोई परेशानी...

Hello friends,   मानो या ना मानो, आप सभी बालकों को चाहिए कि आप मुझे दिल से धन्यवाद दें। क्योंकि आप जब छोटे थे, तब आपको किसी ने साइकिल चलाना सिखाया था, जब आपको चलाना आ गया तो आपने उनको बोला था – शुक्रिया।    जब आप पढ़ते थे,...

छगनभाई के घर के आंगन में मधुमक्खी का छत्ता लगा हुआ देखकर मगनभाई ने कहा, ‘भाई! आपके तो आंगन में ही मधुमक्खी का छत्ता है, तो आपको तो मुफ्त में शहद मिल जाता होगा ना?’   यह सुनकर छगनभाई ने जवाब दिया कि, ‘नहीं, शहद तो नहीं...

(यहाँ पर दी गई जानकारी को शांत चित्त से अंत तक पढ़ने का अवश्य श्रम करें।)   ऑस्ट्रिया के जिस वैज्ञानिक की बात से पूर्व का लेख अधूरा छोड़ा था, उस बात का अनुसंधान करते हुए आज इस लेख की शुरुआत करते हैं।  कुछ दिन पूर्व बार एसोसिएशन...

आज इस लेख में एक साथ अनेक प्रश्नों के समा-धान आपको मिलने वाले हैं। शायद इस लेख को जो बराबर समझ लेगा, वो वर्तमान में चल रहे खेल को और भविष्य के लिए बन रही जेल को समझ लेगा।    आज से 6 माह पूर्व एक मुनिराज...

प्रश्न :  महाराज साहब! कंदमूल अभक्ष्य क्यों है?   उत्तर :  जमीनकंद के भक्षण से आत्मा को दुर्गतिगमन आदि नुकसान होता है। ऐसा भगवान ने अपने केवलज्ञान में देखा है, और इसलिए भगवान ने उसका निषेध किया है। इसलिए कंदमूल अभक्ष्य है।   हमारी किसी भी चीज के स्वीकार या त्याग...

एक बार टीचरने चिंटू को पूछा,  “बोल! 1) पैसा, और 2) बुद्धि, इन दोनों में से यदि तुझे कोई एक चीज पसंद करके लेनी हो, तो तू कौन सी चीज लेगा?” चिंटू, “टीचर मैं तो पैसा लूँगा।” टीचर ने कहा, “मैं होता, तो बुद्धि माँगता।” चिंटू, “टीचर! आपकी बात...

पूज्य चिदानंद जी महाराज रचित प्रथम अध्यात्म-पद परिशीलन स्व में समा जाने का स्वर्णिम अवसर   प्रश्न के प्रश्न का प्रश्न   परिणति होगी या नहीं, वास्तव में यह प्रश्न है ही नहीं, परिणति तो प्रत्येक समय में हो ही रही है। वास्तव में प्रश्न यह है, कि कौन-सी परिणति हो रही है? स्व परिणति,...

Hello Friends,   आज बात की शुरूआत एक कहानी से करते हैं।   रास्ते से दो लड़के गुजर रहे थे। बारिश का मौसम था। बीच रास्ते बारिश गिरनी शुरू हुई, और थोड़ी ही देर में तो इतनी जोर से गिरने लगी, कि चलना मुश्किल हो गया।   दोनों ने रास्ते के...

Hello Friends,   तीर्थंकर प्रभु बनने की यात्रा में हम अग्रसर हैं। एक के बाद एक कदम बढ़ाते-बढ़ाते आज हम सोलहवें पद पर आकर खड़े हैं, जिसका नाम है जिन पद।   जिस शब्द की हम जैनों को बड़ी महिमा है, वह शब्द है 'जिन'। जो 'जिन' के अनुयायी व...

मेरे प्रभु पारसनाथ     आंगन में कल्पवृक्ष पल्लवित होने पर जितना आनन्द प्राप्त नहीं होता, उतना आनन्द आज मेघाशा के हृदय में था। जब से पार्श्वनाथ प्रभु गृहांगन में विराजित हुए, तब से मेघाशा का मन-मयूर प्रसन्नता से नृत्य कर रहा था। वह प्रतिदिन प्रभुभक्ति के रंग...

Real Need   संघ की व्यक्तिगत या समष्टिगत, सभी समस्याओं का समाधान वस्तुपाल है। बस, वस्तुपाल को तैयार करो, बाकी सब कुछ वस्तुपाल देख लेगा। हम और सब कुछ खड़ा कर देते हैं, फिर वस्तुपाल को खोजने के लिए निकल पड़ते हैं। पर वस्तुपाल ढूंढने पर भी...

कुछ दिनों पूर्व जूही चावला के द्वारा दायर याचिका सर्वोच्चन्यायालय ने खारिज तो की ही, ऊपर से 20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इससे एक स्पष्ट संदेश दिया गया कि, जो हमसे (5G से) टकरायेगा, चूर- चूर हो जायेगा।   5G नामक बादशाह की सवारी जब...

प्रभु का जन्म होते ही सृष्टि में आल्हाद हुआ, प्रकृति में स्वयंभू उत्सव होने लगा, जलवायु की चेष्टाएँ प्रसन्न नजर आने लगीं, दिशाएँ उद्योतमय हुईं, पृथ्वी का एक-एक कण उर्जावंत सा हो गया, वृक्षों की अभिव्यक्ति में भी हर्ष उमड़ रहा था।    प्रभु के जन्म से...

प्रश्न: हमारे यहाँ चढ़ावा आदि पैसों में क्यों बोले जाते हैं? इत्यादि बातें आपने सुंदर तरह से तर्कसहित समझाईं और वे समझ में भी आ गईं। हमारे श्रीमंत श्रावक प्रभुभक्ति के, प्रतिष्ठा आदि के चढ़ावों में बिना प्रेरणा किये भी करोड़ों की बोली बोलते हैं।...

शिक्षण और संस्कार   शुद्ध जीवन व्यवहार की दृष्टि से संस्कार की बहुत ही आवश्यकता है। “क्यों आया ?” “कैसे आया ?” “ किस लिए पधारे ?” इन तीनों वाक्यों में कितना अंतर है? अर्थ एक ही है, परन्तु वाणी में भिन्नता है। संस्कारयुक्त वाणी मनुष्य की...

(मंत्री मित्रानन्द शव के द्वारा कहे गए वचनों को भूल नहीं सकते थे, इसलिए राजा से मौंन अनुमति लेकर पाटलिपुत्र छोड़कर कहीं और चले गए। तत्पश्चात आगे क्या होता है पढ़िए…।)   भेड़–बकरियों की तरह सभी दासों को बाँध दिया गया था। वहाँ रहे हुए दासों की...

एक रशियन तत्त्वचिंतक, जो बुद्धि से ज्यादा हृदय को प्रधानता देता था, ज्ञान के फलस्वरूप प्रसन्नता का हर पल वह अपने जीवन में अनुभव करता था। उसे एक बार राजा ने किसी अपराध के कारण जेल में बंद कर दिया।   7 दिनों के बाद राजा यह...

Hello friends !    इस बार बीस स्थानक पद का 15वां पद आ गया है, जिसका नाम है ‘गौतम पद।’ हालाँकि यह ‘दान पद’ के नाम से जाना गया है, पर फिर भी ‘गौतम पद’ के नाम से ही जगत में मशहूर है। क्योंकि जगत के दानवीरों...

प्रभु का पुन:प्रागट्य   हुसैन खान के आक्रमण से भयभीत हुए श्रेष्ठी खेतसिंह की तरह अनेक श्रेष्ठी अपने-अपने आवासों को छोड़कर पाटण को अलविदा कर चुके थे।   शून्य घरों की तरह अनेक भवन भी खाली और सुनसान पड़े हुए थे।   राजभवन और महल भी अस्त-व्यस्त थे।   पाटण की दुर्दशा देखकर...

5 गुण   संघ के श्रावक बनने के लिए पांच गुण अति आवश्यक हैं।   ज्ञान - वर्षों की दैनिक साधना के बाद तत्त्वज्ञान की गहराई प्राप्त हो जानी चाहिये।   वैराग्य - नाम आदि दुन्यवी प्रलोभन के प्रति वैराग्य भाव होना चाहिये।   अध्यात्म - आत्मा के भीतर में उतरा हुआ होना...

फेथबुक के प्लेटफार्म से हमने एक साल पहले जो-जो बातें बताई थी, वो बातें आज सच साबित हो चुकी हैं, इसका हमें आनंद भी है और अपरंपार दु:ख भी।   हमने गत साल बताया था कि, वर्तमान रोग में बताई जा रही दवाई कितनी कारगर होगी, वह...

प्रश्न : हमारे यहाँ पैसों का बहुत बोलबाला है। प्रभु की प्रतिष्ठा है, तो चढ़ावा बोलो कि पहली पूजा कौन करेगा? मुमुक्षु को विदाई तिलक करना है तो चढ़ावा बोलो। हर जगह चढ़ावा… चढ़ावा… चढ़ावा… पैसा… पैसा… पैसा… ऐसा क्यों ?   उत्तर : जब अनेक भावुक...

एक पौराणिक कथा है;   एक बार नरक के जीवों ने ईश्वर से शिकायत की, “आप पक्षपात करते हैं। देवों को आनंद और सुख देते हैं, और हमें दुख, त्रास और पीड़ा देते हैं।”   ईश्वर ने कहा, “नहीं ! मैं कोई पक्षपात नहीं करता। सभी को अपनी योग्यता और...

अहो ! आज हम अरिहंत बनने के सफर के 14 वें मुकाम पर पहुँच चुके हैं। और आज जिस मुकाम पर खड़े हैं उसका नाम है - तप पद।   तपस्या और जीवदया ये दोनों ही जैनियों की पहचान है। हमारा धर्म महान क्यों है? क्योंकि इसमें दो...

आक्रमण और उत्थापन     सभी का श्वास थम सा गया था।   हृदय के धड़कनों की गति बढ़ती जा रही थी।   जैसे-जैसे समाचार सुनने में आ रहे हैं, वैसे-वैसे सभी भय से काँप रहे थे।   तुर्क देश का बादशाह हुसैन खान सिन्ध की ओर से अत्यन्त बलशाली सेना के साथ भारत...

अस्तित्वाभिमान : I am something. यह अस्तित्वाभिमान है। मैं कुछ हूँ, दिमाग के इस भूसे से (पारे से) जमीन से ऊपर चलने वाला इंसान एक कच्ची सैंकड़ में गर्मागर्मी कर बैठता है। वस्तुपाल का क्या अस्तित्व था उसका मरणोत्तर प्रमाण भी बहुत अद्भुत है।   उसकी मृत्यु से वृद्धगच्छ...

माइक्रोचिप के बारे में विगत कईं महीनों से लिखे आलेखों के बीच इस महीने आई एक खुशखबरी से आपको अवगत कराना चाहूँगा।   अमेरिका का इण्डियाना 11वां स्टेट बन गया है, जिसने अपने राज्य में माइक्रोचिप को प्रतिबंधित कर दिया है। इससे पहले   1) आर्कन्सास   2) केलिफ़ोर्निया   3) मसूरी   4)...

परमात्मा देह को संयोग के रूप में धारण करते हुए भी स्वरूप से देह को धारण नहीं कर रहे थे।    धारण करने के लिए धारणा चाहिए, और धारणा उसकी की जाती है, जो कभी अपरिचित रहा हो, या कभी अपरिचित हो जाता हो।    जो ‘स्वयं’ नहीं है उसकी धारणा होती...

अनीति से अंतराय बँधता है यह जिनोक्त बात हमने पिछले लेख में बैंक के दृष्टांत से देखी। इस लेख में हम इसे शास्त्रीय तर्क के द्वारा देखेंगे।   श्री बृहत्कल्पसूत्र की 1049 वीं गाथा की टीका में Reference के रूप में दी गई गाथा में कहा है...

(अमरदत्त और रत्नमंजरी के शादी के पश्चात राजपुरोहित के पास सेनाधिपति आए और राजा के अकाल मरण के दु:खद समाचार दिए। आगे क्या होता है पढ़िए।)   कोयल के कंठ से निकलते मधुर संगीत के जैसे शब्दों का संगीत पूरी प्रजा के मुँह से निकल रहा था।   ‘क्या...

गाँव में एक बाँसुरी बेचने वाला बाँसुरी की सुरीली तान बजाता-बजाता गलियों में घूम रहा था। एक बालक ने मम्मी से जिद की, ‘मम्मी ! मुझे भी बाँसुरी चाहिए।’ मम्मी ने 10 रू. की बाँसुरी खरीद ली। बालक ने बाँसुरी बजायी पर सुर अच्छा नहीं...

नमस्ते मित्रों !   कोरोना नाम के राक्षस ने वापस अपना सिर उठाया है। फिर पूरे देश में कोहराम मच गया है। जो परिस्थिति विषम है, उसमें मीडिया पेट्रोल छिड़कने का काम करता है और सब कुछ ज्यादा ही मुश्किल बनता जा रहा है। डर से सहमा...

!! अथ श्री गोडी पार्श्वनाथजी की कथा !!   अखिल विश्व में 23 वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान का प्रभाव अतिशय प्रख्यात है।   प्रायः ऐसा कोई जिनालय नहीं होगा कि जिसमें पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमाजी प्रतिष्ठित न हो, साथ ही ऐसा कोई जैन श्रावक का घर नहीं होगा...

99.50% = Fail   शायद हमारी बहुत गाथाएँ कंठस्थ ना हो सके, अट्ठाई हो ही ना सके, बहुत दान ना दे सकें, फिर भी हमारा मोक्ष हो सकता है। लेकिन संघ के प्रति के अहोभाव के बारे में हमारे यदि 99.50 मार्क्स भी आ जाएँ, फिर भी...

भारत देश में रहने वाले लोगों को आज तक ऐसा लग रहा था कि, हम प्रजा हैं और राजा हमारे सुखों के लिए प्रतिबद्ध है।   राजा वह होता है, जो प्रजा को प्रसन्न रखने के लिए प्रयत्नशील होता है। प्रजा को सुखी देखना चाहता है वह...

माता से अलग होना अगर भौतिक जन्म है, तो शरीर से अलग होना आध्यात्मिक जन्म है।    अलग हुए बिना जन्म नहीं होता, प्रभु गर्भ में थे तो माता के साथ जुड़े हुए थे, जुड़ाव हटा, और जन्म हुआ ! स्वतंत्रता छूटने से ही तो आती है।    और माँ वो है जो...

इस भव में लोन या ब्याज कुछ भी वापस नहीं करना है, लेकिन परलोक में आना, पाई, ब्याज, सिक्के समेत चुकाना पड़ेगा। ऐसा करार करने वालों को बिना कोई जान-पहचान के भी लाखों रुपये की लोन देने वाले आस्तिक सेठ से चार चोरों ने लाख-लाख...

हमारे परम हितैषी महर्षियों ने अपनी विशिष्ट बुद्धि शक्ति और वैज्ञानिक प्रतिभा से, सात्त्विक और संस्कारमय जीवन जीने के लिये क्या खाना चाहिये ? और क्या नहीं खाना चाहिये ? इस संबंध में विधि निषेधों का ज्ञान कराया है। इसमें भी जैन महर्षियों ने तो...

एक व्यक्ति डॉक्टर के पास दिखाने के लिए गया। डॉक्टर ने उसका Full body check-up किया और कहा कि आपके शरीर का हर अंग Check करके मुझे ऐसा लगता है कि:    मस्तक : आपका मस्तक बराबर है, कोई माइग्रेन या हेमरेज नहीं है, उसका कोई लक्षण...

(नगर में फैली हुई “मारी” वह दूसरी कोई नहीं मगर खुद की बेटी राजकुमारी रत्नमंजरी है, ऐसी शंका राजा के मन-मस्तिष्क में जब हो चुकी थी। तब इस शंका के समाधान के लिए राजा अब क्या करते हैं? पढ़िए। )   नदी में बहते हुए पानी की...

एक गाँव में एक छोटा-सा बालक अपनी विधवा और गरीब माँ के साथ रहता था। एक बार निकट के गाँव में मेला लगा हुआ था। बालक की मेले में जाने की बहुत इच्छा थी। माता ने मजदूरी करके, और बचत की हुई रकम में से 2 रुपये...

Hello Friends,   आज हमें बड़े ही पेचीदे मामले पर वार्तालाप करने जा रहे हैं।   भगवान बनने की यात्रा पर निकले हैं हम, और हमारा अगला, यानी बारहवां पड़ाव है ब्रह्मचर्य।   शब्दों का उच्चारण तो भारी है ही, साथ ही इसके आचरण में अच्छे-अच्छों के पानी उतर जाते हैं।   आज...

“Power of Unity” की लेखमाला में हमने इसके पहले के लेखों में ‘UNITY’ के ‘UNIT’ तक के portion को समझ लिया था, जो इस प्रकार था:   U = Understanding N = No Negatives I = Involvement T = Transparency   और आज हम बात करेंगे ‘UNITY’ के अन्तिम लैटर ‘Y’ की...

श्रावक   श्रावक मतलब क्याँ? जिसके लिए 'जैन' बेटा बन गया और बेटा जैन बन गया हो उसका नाम श्रावक।   'जैन' मात्र बेटा बन जाये यानी परम स्वजन बन जाये। सारे वाद-विवाद-फसाद-अहं आदि का अंत हो जाए। बेटा जैन बन जाए तो पुत्र भी परिवार का पोषण भी पुत्रादि...

केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने अभी-अभी बड़ी घोषणा कर डाली, ‘शीघ्र ही देश के सारे टोल-बूथ हटा दिए जाएंगे। भविष्य में टोल-बूथ का स्थान जीपीएस लेगा। आपकी यात्रा के किलोमीटर के अनुपात में टोल स्वत: ही कटता जाएगा।‘   इस घोषणा के खिलाफ राजस्थान पत्रिका...

प्रभु महावीर माता त्रिशला रानी के गर्भावास से, शरीर से  पूर्ण निष्पन्न होकर निष्क्रमण प्राप्त करने को हैं, जन्म होने को है...

आज से 100 वर्ष पूर्व कलिकाल सर्वज्ञ श्री हेमचंद्राचार्य हुए थे। उन्होंने त्रिषष्टि-शलाकापुरुष चरित्र के आठवें पर्व में 22वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान का तथा श्री कृष्ण का जीवनचरित्र लिखा। उस ग्रंथ में उन्होंने पांड़वो का भी वर्णन किया है। जैन मत के अनुसार परमात्मा...

जिसे जितनी लोन चाहिए उतनी ले जाइये, किसी भी पहचान पत्र या दस्तावेज आदि की जरूरत नहीं है। इस भव में ना तो रकम वापस करनी है, ना ही ब्याज देना है; लेकिन पर (दूसरे) भव में पठानी ब्याज के साथ सब कुछ भरपाई कर...

(नगर में फैली हुई “मारी” वह दूसरी कोई नहीं मगर खुद की बेटी राजकुमारी रत्नमंजरी है, ऐसी शंका राजा के मन-मस्तिष्क में जब हो चुकी थी। तब इस शंका के समाधान के लिए राजा अब क्या करते हैं? पढ़िए। )   चंदन जैसा शीतल पवन खंड के...

प्रत्येक जीव में अपनी आत्मा का दर्शन करने वाला व्यक्ति दूसरों के दुःख में किस हद तक विचलित हो सकता है, इसका 150 वर्ष पूर्व का एक प्रसंग जानने को मिला –   कच्छ-वागड़ में भरूड़ीया गाँव में रहने वाले एक श्रावक के घर के पास एक...

नमस्ते मित्रों !   ≈ आप विद्यार्थी हो, तो परीक्षा में पास होना आपके लिए बहुत बड़ा चेलेन्ज है?  ≈ आप बिज़नेस मेन हो, आपके सामने कड़ी चुनौती है, टर्नओवर कैसे बढ़ाना?  ≈ आप डॉक्टर हो, तो मरीज़ को क्रिटीकल कंडीशन से बाहर लाना आपके सामने बड़ी चुनौती है?  ≈...

3 अक्षर   श्री भगवतीसूत्र की एक घटना है। भगवान महावीरस्वामी गौतमस्वामी को कहते हैं कि, “गौतम! अभी खंदक परिव्राजक यहाँ आयेगा।” प्रभु के यह वचन सुनकर गौतमस्वामी प्रभु की इजाजत लेकर खंदक परिव्राजक को लेने जाते हैं।   जो गौतम स्वामी के सीनियर मुनि नहीं है, जो मुनि...

गत अंक में हमने 5G नेटवर्क के दुष्परिणाम बतायें थे, मगर कईं लोगों को प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि, यदि इतने सारे दुष्परिणाम है तो सरकार पूरे देश में 5G नेटवर्क की जाल क्यों बनाना चाहती है? इससे सरकार को फायदा क्या है? और सबसे...

माता त्रिशला रानी ने जब चैत्र शुक्ल त्रयोदशी की रात्रि में प्रभु के पार्थिव पिंड को जन्म दिया, उससे पूर्व प्रभु ने जन्मातीत तत्त्व को प्राप्त कर लिया था।    पराई चीजों को आधार बनाकर खड़े होने वाले अहंकार से पार हो चुके प्रभु, अस्तित्व के सारभूत...

मैं कृष्ण हूँ। मैं महाभारत के युद्ध का महासूत्रधार था, रामायण के राम की तरह ही उस समय मैंने सबसे सफल योद्धा के रूप में काम किया। परंतु मुझे पता था कि सेना को एक अच्छे योद्धा की नहीं पर अच्छे मार्गदर्शक की जरूरत है।   राम...

पिछले लेख में हम अनीति को टालने की बातों के बारे में सोच रहे थे। अनीति के विषय में एक अन्यधर्मी मेगेज़ीन में पढ़ी हुई कथा याद आ रही है।   एक अरबोंपति-खरबोंपति धनाढ्य श्रीमंत था। पूरा आस्तिक था। पुण्य, पाप, परलोक आदि सभी में दृढ़ श्रद्धावान...

( राजकुमारी रत्नमंजरी के हाथों में पत्र सौंपकर मित्रानंद पुनः वेश्या के घर लौट आया और तत्पश्चात आगे क्या होता है पढ़िए)   चढ़ा हुआ मुंह लेकर राजद्वार का द्वारपाल राजा की सभा में दाखिल हुआ।   "क्या समाचार है द्वारपाल? क्यों इस तरह मुंह लटकाकर खड़ा है?" राजा...

तीन लोग एक गाँव में दाखिल हुए। उन्होंने गाँव में प्रवेश करते ही जो पहला घर आया, उसके आंगन में खड़े होकर आवाज लगायी। सज्जन जैसे दिखने वाले उन तीन लोगों की आवाज को सुनकर एक स्त्री बाहर आयी। उसने उनका स्वागत किया और कहा...

Hello Friends!   अरिहंत बनने के बीस कदमों की बात हम कर रहे है। यूं देखे तो अरिहंत बनना बहुत मुश्किल है, और यूं देखे तो अरिहंत बनना बड़ा ही आसान है।   आज हम ऐसे पड़ाव के बारे में जानेंगे, जो हमें अरिहंत बना सकता है, वह है...

अनन्त भवों में भटकते हुए एकत्रित की गई पुण्यराशि के प्रभाव से हमें लोकोत्तर जिनशासन की प्राप्ति हुई है।   इस अद्भुत जिनशासन की प्राप्ति होने के पश्चात् भी जीव शासन को सफल करने हेतु पुरुषार्थ नहीं करता, तथा मोहराजा के वशीभूत होकर शासन को ही गलत...

स्वामित्वाभिमान   जिसमें कुछ पाने की वृत्ति है, या पा लेने का गुमान है।    मैं आपको पूछता हूँ - संघ की सेवा करके हमें चाहिये क्या? नाम, पद, प्रशंसा, वाहवाही, हार-तोरे? यदि हाँ, तो इसका मतलब यह हुआ कि हमें चंदन को जलाकर राख चाहिये। वस्तुपाल जीवन के...

गत अंक में हमने इसी मंच से ऐलान किया था कि, आने वाला कल बहुत ही खतरनाक होने जा रहा है, जिसमें हमारा विकास के पीछे का पागलपन जिम्मेदार होगा।   आज इसी बात की जरा विस्तार से चर्चा कर लेते है। रिलायन्स ने कुछ दिनों पूर्व...

द्रोणाचार्य की पाठशाला में अलग-अलग राजकुमारों ने युद्धकला आदि अनेक प्रकार की विद्याएँ प्राप्त की थी। अमुक्त और करमुक्त ऐसे शस्त्रों की कला सभी राजकुमारों ने सीखी थी। भीम और दुर्योधन गदा युद्ध में प्रवीण हुए थे। महापराक्रमी अर्जुन अस्त्र और शस्त्र के उपरांत राधावेध...

पिछले लेख के अंतर्गत आखिर में यह प्रश्न किया गया था कि नौकरी करने वालों के लिए नीति और प्रामाणिकता क्या होती है?   इसका उत्तर यह है कि उसको धन की चोरी, समय की चोरी, काम चोरी, दिल चोरी और जानकारी (Data) की चोरी, आदि इस...

कुटीर के भीतर की दुनिया को उज्ज्वलित करने की हिम्मत जब चाँद सितारों ने ना दिखाई, सूरज का तेज भी जब गुफाओं और खंडहरों में ना पहुँच सका, तब मिट्टी के छोटे से दिये के कलेजे में समर्पण का भाव जाग उठा।    उसने कहा, मुझे थोड़ी...

(मित्र अमरदत्त की स्वप्नसुंदरी रत्नमंजरी के पास पहुंचने के लिए मित्रानन्द ने अक्का के पास से राजमहल का नक्शा लिया और पूरी जानकारी भी ली। फिर आगे क्या होता है पढ़िए…)   “नामदार! मेरी बेटी ने आपका संदेशा पहुंचा कर अपना उत्तरदायित्व पूरा किया है। मैंने आपको...

"पप्पा ! मुझे नए कपड़े दिलाओ ना! कल दिवाली है। मेरी सभी सखियाँ दो दिन से नए-नए कपड़े पहनकर घूम रही हैं। मुझे पुराने कपड़े पहनकर जाने में शर्म आती है। मुझे नए कपड़े चाहिए। चाहिए मतलब चाहिए ही...

Hello Friends!   परमात्मा बनने की सफ़र में हम अग्रसर हैं। आज एक बहुत महत्त्वपूर्ण पद पर हम विचार करेंगे। आज का हमारा पद है - ‘श्री विनय पद।’   विनय एक श्रेष्ठ आलंबन है। इसी आलंबन के जरिए तीर्थंकर नामकर्म का बंध हो पाता है। गौतम स्वामी जी...

एक गिलास में थोड़ा पानी डालकर गुरु ने दो शिष्यों को बुलाया, और पूछा कि इसमें क्या दिखता है? एक शिष्य ने कहाँ, 'गुरुजी! यह गिलास आधा खाली है।'  दूसरे शिष्य ने उत्तर दिया, 'गुरुजी! यह गिलास आधा भरा हुआ!'    यह प्रसंग तो अत्यंत प्रसिद्ध है, पर :   "Unity"...

  संघ संवेदना   परम पावन श्री भगवतीसूत्र में एक घटना का वर्णन है। चमरेन्द्र के अपराधी सिद्ध होने के कारण सौधर्मेन्द्र ने उन पर वज्र छोड़ा। बाद में ख्याल आया कि वे तो भगवान की शरण में थे। प्रभु के शरणागत पर वज्र छोड़ा, इसके पश्चात्ताप के...

[यह लेख किसी राजेश जी आर्य ने लिखा हुआ है और अंग्रेजी भाषा में डॉ. बिश्वरूप रॉय चौधरी की ऑनलाइन मैग्जीन में छपा है, मगर सांप्रत कालीन वैक्सीन के बारे में सटीक जानकारी प्रदान कर रहा है, अतः हम इसका हिंदी अनुवाद करके यहाँ प्रस्तुत...

माता के गर्भ से निष्क्रमण होना जन्म कहलाता है, पर चेतना का शरीर में से निष्क्रमण होना   जागरण कहलाता है। जन्म से पूर्व ही जागरण की धारा में ज्योतिर्मय हो चुके थे प्रभु….।   जब शरीर के निर्माण की विश्व के समक्ष प्रस्तुति हो, उस घटना को लोग जन्म कहते हैं।  और...

महाभारत के पात्रों में नेत्रदीपक पात्रों के रूप में विपुल प्रेरणा देने वाले पात्रों के रूप में पहले श्रीकृष्ण आते हैं, तो लगभग उनकी बराबरी में मेरा नंबर लगता है। बहुत सारी चीजों में मैं अर्जुन से भी बहुत बढ़कर (सवाया) था।    किसी भी कार्य के...

हमने पिछले लेख में देखा था कि कोई भी व्यक्ति, वस्तु या प्रवृत्ति जीव को सुख नहीं दे सकती, ना ही दे रही है, बल्कि जीव का खुद का रस ही खुद को सुख देता है।   मंदोदरी ने रावण को स्वर्ग जैसा सुख ही दिया था,...

(सोपारक नगर में रात भर जाग के मृतक की रक्षा की। नगर को मारी से बचाया। सेठ ने कहा था कि यदि तू रात भर जागकर मृतक की रक्षा करेगा तो तुझे  1000 दीनार दिया जाएगा। किंतु  500 दीनार देने के बाद आगे के दीनार...

जंगली विस्तार में रहने वाली एक स्त्री के अपने पति के साथ बहुत अच्छे संबंध नहीं थे। उसे हमेशा ऐसा ही लगता था कि उसका पति उसे प्रेम नहीं करता है। वह एक दिन जंगल में रहने वाले एक संन्यासी के पास गई और संन्यासी...

नमस्ते मित्रों !   C.A को किसी पेशन्ट का हार्ट का ऑपरेशन करने का कहो, वह मना कर देगा, डॉक्टर को किसी मल्टीनेशनल कंपनी का रीटर्न क्लीयर करने को कहो, वह ना कह देगा...

किसी एक आश्रम में गुरुजी के दो शिष्य थे। दोनों शिष्यों के मन में एक-दूसरे के लिए अत्यन्त ईर्ष्या-भाव था। छोटी-छोटी बातों को लेकर दोनों झगड़ते रहते थे। एक दिन गुरुजी ने दोनों के झगड़े का हमेशा के लिए निवारण लाने हेतु सभी कामों का...

संघत्याग   सुमितभाई होस्पिटलाईज्ड हुए। उनका मित्र खबर पूछने गया। तबियत पूछी, लगभग कुछ भी अच्छा नहीं था। तीन फ्रेक्चर, बुखार, उल्टी, पीड़ा, दवाओं की साइड इफेक्ट्स, इत्यादि। मित्र सरफिरा था, बोला "तुझे शरीर इतना परेशान करता है! कितना बुरा है तेरा शरीर! फोकट तू इस शरीर...

विगत दो लेखों से लगातार हम Online के दुष्परिणामों को बताते आ रहे है। उसी कड़ी में आज, इस Online के और एक खतरनाक पहलू की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहेंगे।   (आपको जानकर आश्चर्य होगा कि, हमने दूसरे पार्ट में जिन व्यसनों के बारे में...

प्रभु गर्भ में भी पूर्णजागृत थे। गर्भ सृजन का स्थान है, सृजन शरीर का होता है।   प्रभु सृजन से परे हैं।   जो नजदीक है, इतना पास कि आप उसे पास भी नहीं कह पायेंगे, कह देंगे की यह तो मैं ही हूँ, इतना पास,  पास से परे होना ही जागृति...

आर्यावर्त के कांपिल्यपुर नगर में महाराजा द्रुपद राज्य करते थे। उनका युवराज पद पर आरूढ़ धुष्टद्युम्न नाम का पुत्र था। अद्वितीय रूप और गुणालंकृत द्रौपदी नाम की उनकी बहन थी। जब वह विवाह योग्य उम्र की हुई, तब निर्णय किया गया कि, भारतवर्ष का कोई...

पिछले लेख में हमने देखा कि जिसमें भारतीयों को बहुत आनंद आता है ऐसी क्रिकेट में अम-रीकनों को ऊब आती है। शक्कर को चखने वालों को चाहे भारतीय हो या चाहे अमरीकन हो...

  ( पाटलिपुत्र आने के बाद नगर के प्रवेश के पूर्व एक भव्य प्रासाद के खंभे पर चित्र में अंकित स्त्री को देखकर अमर अत्यंत मोहित हो गया और उसे पाने के लिए वियोगभाव से तड़प रहा था। तब अपने मित्र की इच्छा पूर्ण करें एवं...

"शत्रुजनाः सुखिनः समे”   नेल्सन मंड़ेला साउथ आफ्रिका के सिवील राईट्स के लिए व्हाईट रेजीन 'पी.डबल्यु ओथा' कि जो साउथ आफ्रिका के प्रेसीडेन्ट थे, उनके सामने अहिंसक लड़ाई चालू की। गांधीजी के जैसे 'फ्रीडम फाईटर' बने।   सरकार ने उन्हें जेल में डाल दिया। 10"x 10" से भी छोटी...

हेलो फ्रेन्ड्स !   अरिहंत बनने की यात्रा में हम अग्रेसर है।    संसार में कभी भी कोई भी व्यक्ति अपनी सफलता का रहस्य किसी को भी बताना नहीं चाहता। बल्कि वह उस राज़ को हमेशा छिपाने का प्रयास करता है। उसके पीछे एक यही कारण होता है, कि...

Relation   यह मेरा बेटा है, इस मुद्दे पर हम सब कुछ गौण करने को तैयार हैं। वो नवकार गिनता है, इस मुद्दे पर हम कुछ भी गौण करने को तैयार नहीं हैं। इसका अर्थ यह है कि बेटे के साथ हमारा पूरा रिलेशन है, पर नवकार...

वर्षों पहले आगरा में एक स्थान पर रुके थे। मंदिर जाने के लिए सुबह-सुबह बाहर निकले तो बाहर बैठा चौकीदार बड़ा उदास दिख रहा था। मुझे दया आ गई, सहजता से पूछा तो रोती सूरत में जवाब मिला, 'मेरा सब कुछ लुट गया।' रात भर...

मैं युधिष्ठिर पांच पाण्डवों और सौ कौरवों का सबसे ज्येष्ठ भ्राता हूँ। पुत्र के लक्षण पालणे में दिखाई दे जाते हैं। मेरा परिवार पुण्यशाली था और ऐसे परिवार में मेरे जैसे गुणवान का जन्म हुआ, मानो दूध में शक्कर मिली और शिखर पर ध्वजा खिली।...

एक बार के लिए मानिए कि आपकी वार्षिक आमदनी 10 लाख रूपये है, और पूरे वर्ष का कुल खर्च 8 लाख रूपये है। मतलब 2 लाख रूपये की शुद्ध बचत है। पिछले अनेक वर्षों से यही सिल-सिला चल रहा है। तो क्या आप मुझे बताएँगे,...

अनन्तज्ञानी तीर्थंकर श्री भगवान महावीर के द्वारा आज से 2576 वर्ष पूर्व जिनशासन की स्थापना की गई थी।   समय के प्रवाह में बहते-बहते इतने वर्षों के पश्चात् अपने शुभ कर्मों के फल स्वरूप ही अत्यंत समृद्ध एवं उन्नत ऐसे जिनशासन की हमें प्राप्ति हुई है।   हमें यह जिनशासन...

एक दर्दनाक सत्यघटना से शुरूआत करते हैं :   जम्मू का एक गरीब परिवार था।   गाय का दूध बेचकर अपना जीवन यापन कर रहा था। शायद अपनी गाय का दूध अपने बच्चे को भी वे नहीं दे पाते होंगे। लॉकडाउन और सब कुछ ऑनलाईन ने कमर तोड़ दी...

( पाटलिपुत्र आने के बाद नगर के प्रवेश के पूर्व एक भव्य प्रासाद को देखकर उस में प्रवेश कर किया । उस मंदिर के खंभे पर चित्र में अंकित स्त्री को देखकर अमर अत्यंत मोहित हो गया और उसे पाने के लिए वियोगभाव से तड़प...

( क्रमांक 1 से 6 तक मूलाधार चक्र ध्यान के मुताबिक ध्यान करने के पश्चात )   फिर विचार कीजिए कि दूर क्षितिज से गहरे नीले, Grey या Navy Blue रंग की कोई चीज अपनी ओर आ रही है। वह धीरे-धीरे निकट आ रही है, बड़ी...

नमस्ते मित्रों !   Faithbook के जरिए हम अरिहंत बनने की यात्रा में अग्रसर हो रहे हैं। दुनिया भर की और सभी पदवीयाँ, संपत्ति से, मेहनत से, बुद्धि से अर्जित की जाती है। परंतु यह 'अरिहंत' पदवी यूं देखे तो बड़ी सरलता से और यूं देखे तो...

सुबह पति जब तैयार होकर घर से बहार निकल रहा था, तब अंदर से उनकी श्रीमतीजी (पत्नी) आयी, उनके हाथ में केशर-बादाम-पिस्तावाला दूध रखा और पत्नी ने कहा “आप यह दूध पीकर ही जाना” पति को कुछ शंका हुई अत: पुछा “लेकिन क्यों ?”   श्रीमती ने...

“सहसा न विदधीत क्रियाम्, अविवेकः परमापदां पदम् ।   वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्घा: स्वयमेव सम्पद:।।"     छगन : अरे मगन! तुम क्या करते हो?   मगन : मैं कुछ भी नहीं करता, सिर्फ सोचता रहता हूँ। और छगन! तू क्या करता है?   छगन : मैं ज्यादा सोचता नहीं, सिर्फ काम करता हूँ।   दुनिया...

त्रिशला रानी शंकित हो गये, क्योंकि गर्भ का स्पंदन अब बंद हो गया है।   जीवन की कल्पना स्पंदन से होती है, जीवन का अनुभव तो निःस्पंद से मिलता है।   त्रिशला रानी के गर्भ में जो रचना हो रही थी, वो सारी स्पंदन से जुड़ी हुई थी।   लेकिन जिसकी रचना ही नहीं...

एक्स्ट्रा प्लॉट में कचरा एकत्र हो गया हो तो उसकी बुरी असर बंगले पर होती हुई स्पष्ट दिखाई देती है। रोज मिलने वाले दो-चार घण्टे के खाली समय का उचित प्लान न होने के कारण वह कचरा बन जाता है और उसका प्रभाव बाकी के...

आज से वर्षों पहले यदि किसी व्यक्ति को विरोध करने का जुनून सवार हो जाता था, तो वह अपनी अन्तर्व्यथा गुमनाम रूप से पत्रिकाएँ छपवाकर उनके गट्ठे व्याख्यान सभा, देहरासर के चौराहे या जाहिर कार्यक्रम के स्थलों पर छोड़कर चला जाता था।   लेकिन...

कौरव कुल में पहला गर्भ मेरी माता गान्धारी को रहा, किन्तु मैं इतना पापी था कि तीस माह तक प्रसव नहीं हुआ। मेरी माता ने प्रसव हेतु अनेक प्रयास किए, किन्तु सभी प्रयास निष्फल रहे। इतना ही नहीं, मेरे गर्भकाल में मेरी माता को पापों...

त्रिशला रानी के गर्भ में जो भी घटित हो रहा था, उसे अघटित होकर देख रहे थे प्रभु।   विश्व के सर्वश्रेष्ठ परमाणुओं के गठन से शरीर का  संपादन होने जा रहा था।   यही वो शरीर होगा जिसे मेरूपर्वत पर  कोटि कलशों से अभिषिक्त किया जाएगा।   यही वो देह होगी जिसे लेकर...

“पर्वाणि सन्ति प्रोक्तानि, बहुनि श्री जिनागमे । पर्युषणां समं नान्यत, कर्मणां मर्मभेदकृत् ।।”   भूमिका : वर्ष में (साल में) बारह मास होते है। प्राय: ऐसा कोई महिना नही जिसमें कोई पर्व न आता हो। पर्व आत्मा के परिणामों को ऊँचाई पर पहुँचाने वाला श्रेष्ठ आलंबन है। तीर्थस्थान...

अरिहंत भगवंत के द्वारा प्राप्त जिनशासन इतना अद्भुत-अनोखा-अप्रतिम है कि जहाँ निरन्तर आत्मा के ध्येय के साथ जुड़े हुए अनेक योग हमें प्राप्त होते हैं।   जहाँ दोषनाश से कर्मनाश और कर्मनाश से संसार-नाश की श्रेष्ठ कक्षा का सिद्धान्त है।   जहाँ द्रव्य-क्षेत्र-काल से हमारे भाव की चिंता की...

कुछ दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट में एक किस्सा पहुंचा था । झारखंड के वैद्यनाथ मंदिर के दर्शन खोलने हेतु अधिवक्ता ने सुंदर दलील पेश की थी। निष्कर्ष यह था कि ऑनलाइन दर्शन को हम दर्शन नहीं मानते, अतः भगवान के द्वार खोले जाएँ।   पर्युषण के दौरान...

एक बार चार युवक महान फिलोसोफर सॉक्रेटिस से मिलने गए। उनके साथ थोड़ी बात करने के बाद सॉक्रेटिस ने उनको पूछा : आपको भविष्य में क्या बनने की इच्छा है ?   पहले युवक ने कहा : मुझे विज्ञान में विशेष रूचि है और विश्व प्रसिद्ध बनने...

एक महिला टैक्सी में बैठी, ड्राइवर को गंतव्य स्थान बताया, टैक्सी उस स्थान पर पहुँची तो महिला ने किराया पूछा। टैक्सी वाला बोला, ‘50 रूपया’। महिला ने अपना पर्स देखा और पैसे गिने, फिर वापिस टैक्सी में बैठी और बोली, ‘टैक्सी रिवर्स लेना।’ ड्राइवर ने...

उच्च शिखरों से सुशोभित मंदिरों के दर्शन से हमारी आत्मा को अतीव आनंद की अनुभूति होती है। परंतु, यह आनन्द उन शिलाओं का आभारी है, जिन्होंने उच्च शिखरों के निर्माण हेतु भूगर्भ में स्थापित होकर अपना बलिदान कर दिया।   समग्र विश्व में आज जिनशासन का डंका...

  एक विदेशी पुस्तक है –   अ कल्चरल हिस्ट्री ऑफ वेजिटेरियन्स फ्रोम ई.स. 1600 टु मोडर्न टाइम्स ।   इस में लिखा है कि औरंगज़ेब चुस्त शाकाहारी था ।   वह सब्जी और खीचड़ी खाता था और गंगा का पानी पीता था ।   देश की बड़ी होटलों में खीचडी अलमगीरी – इस...

अरिहंत बनने की मार्वेलस जर्नी पर हम नीकले है। हमारा छठा पड़ाव है उपाध्याय पद।   उपाध्याय भगवंत यानी ऐसे प्रज्ञावान साधु भगवंत जो आगमों के अर्क-निचोड़ को भली भाँति जानते है। स्वयं भी निरंतर आगमों के अभ्यास में निरत रहते है, व दूसरों को भी हमेशा...

हेलो फ्रेंड्स !   अरिहंत बनाने के लिए 20 कदमों की  बातें हम कर रहे है। आपको शायद पता ही होगा कि अरिहंत किसे कहते है। नहीं तो हो मैं बता दूं जिन्होंने अपने सभी शत्रुओं को परास्त कर दिया हो उन्हें अरिहंत कहते हैं।   शत्रु बाहर के...

नदी की किनारे पर वटवृक्षों का राज था, एक विशालकाय साँप की केंचुलीओं की तरह सर्वत्र वटवृक्षों की शाखाएँ फैली हुई थी। नदी का गम्भीर किन्तु प्रशान्त जलप्रवाह किनारों पर रेत के अनेकानेक आकर्षक पटलों का निर्माण कर रहा था। जलप्रवाह के उस गम्भीर किन्तु...

संस्कृत का एक सुंदर सुभाषित है।     विपत्तिकाले समुत्थाने, बुद्धिर्यस्य न हीयते।   स एव दुर्गतिं तरति, जलस्थो वानरो यथा।।     इस सुभाषित का कथा वस्तु इस तरह :   एक बंदर जब दरिया में तैर रहा था, तब एक मगरमच्छ ने अचानक आकर पैर से पकड़कर मुँह में ले लिया। बंदर तैरते-तैरते...

!! ‘नष्टं द्रव्यं लभ्यते कष्टसाध्यम्, नष्टारोग्यं सूपचारैः सुसाध्यम् !!   !! नष्टा विद्या लभ्यतेSभ्यासयुक्ता, नष्टा वेला या गता सा गतैव !!   जो द्रव्य, धन या अन्य मूल्यवान चीज नष्ट हो जाए, चोरी हो जाए या खो जाए तो योग्य उपाय करके, पुण्य की अनु-कूलता से या कड़ा पुरुषार्थ...

महाभारत का इतिहास तो भारतवर्ष का चिर-कालीन इतिहास है। अन्य इतिहास तो बदलते रहे हैं, लेकिन यह महाभारत का इतिहास नहीं बदला, इसीलिए रामायण और महाभारत की समीक्षा अन्य काव्य कृतियों की समीक्षा से अलग की जानी चाहिए। यह इतिहास और काव्य अमर बना इसके...

गुणगण सम्राट्, सुविशाल गच्छाधिपति, सिद्धान्त दिवाकर पूज्यश्री के गुणगान करना गुणों के समुद्र से रत्नों का संचय करने जैसा है। वे स्वयं गुणों के महासागर थे। इस अवसर पर ‘अल्पश्रुतं श्रुतवतां परिहास धाम-’ श्लोक याद आ रहा है। परंतु उनके प्रति भक्ति, लगाव व समर्पण मुझे...

  ( क्रमांक 1 से 6 तक मूलाधार चक्र ध्यान के मुताबिक ध्यान करने के पश्चात )   अनाहत = जीवन, यानी Love   7. फिर विचार कीजिए कि दूर क्षितिज से केशरी रंग की कोई चीज आ रही है। वह धीरे-धीरे निकट आ रही है, बड़ी हो रही है।...

मूलाधार चक्र ध्यान की प्रक्रिया में से 1 से 6 क्रमांक तक ध्यान करने के पश्चात )   7. फिर विचार कीजिए कि दूर क्षितिज से पीले रंग की कोई चीज आ रही है। वह धीरे-धीरे निकट आ रही है, बड़ी हो रही है। वह पीला रंग...

ऐसे पुण्यशाली जीव जिन्हें रोज दो-चार घण्टे का Extra Time मिलता है, उन्हें उस Extra Time में धर्म की वृद्धि करनी चाहिए - गुरु भगवन्त ऐसा उपदेश क्यों देते हैं? इस प्रश्न के उत्तर पर हमारी चर्चा चल रही है। पिछले लेख में हमने देखा...

पिछले लेखों में आपने पढ़ा, कि यदि आप पुण्य-शाली हैं और दिन में 3-4 घण्टे काम करके जरूरत से कहीं अधिक कमा लेते हैं, तो आपको बाकी के समय में नए-नए व्यापार आदि लोभ करने और भोग-विलास के बजाय धर्म-साधना बढ़ानी चाहिए।    वैसे भी लोग Extra...

(5) Liberty : Family शब्द का पांचवां अक्षर है L, और यहाँ L stands for Liberty, यानी स्वातंत्र्य, फ्रीडम। लिबर्टी दो प्रकार की होती है, हितकारक और अहितकारक। हितकारक लिबर्टी ही यथार्थ में लिबर्टी है, अहितकारी लिबर्टी वास्तव में गुलामी है।   बेटे या बेटी को जो...

यौवन के शिखर तक पहुँचते हुए मेरा रूप, गुण, चातुर्य और सौन्दर्य सोलह कलाओं सा खिल चुका था। मेरे पिता अंधकवृष्णि आदि बड़े मेरे विवाह के लिए चिन्तित थे, कि मेरे योग्य कुमार कौन होगा? पिता ने ज्येष्ठ पुत्र समुद्रविजय से सलाह की। समुद्रविजय को...

भक्ति, पर्व और उत्सवों का त्रिवेणी संगम है श्रावण मास। रक्षाबंधन के इस त्यौहार की सबसे बड़ी विशेषता है श्रावणी-पूर्णिमा के दिन होना। आज के दिन चन्द्र अपनी श्रेष्ठ पूर्णता पर होता है। हां, आज के दिन बहन द्वारा भाई के हाथ पर बांधी गई...

यह दुनिया रिश्तों के रंगों से चहक उठती है। रिश्तों की खुशबू से ही ये जहाँ महक रहा है। उसमें भी दिल को जो रिश्ता खूब प्यारा और खुशमिज़ाज़ लगता है वह है दोस्ती का। यह रिश्ता खुन का तो नहीं होता लेकिन इसका जज़्बा...

बिजली के चमकारे की तरह अमरदत्त का बचपन देखते ही देखते पूरा हो गया।   “अमर ! आज से तुम्हे विद्याभ्यास करने के लिए गुरुकुल में जाना है। और वहाँ जाने के बाद तु दूसरे बालकों के साथ मिलकर कुछ तोड़-फोड़ मत करना!” श्रेष्ठी-पत्नी अपने पुत्र को...

हेलो फ्रेंड्स !   C.A. बनना मुश्किल हैं,   F.A. बनना उससे भी ज्यादा मुश्किल हैं।   लेकिन परमात्मा बनना तो सबसे ज्यादा मुश्किल है।   इसलिए तो दुनिया के हर एक इंसान चाहे वो C.A. हो चाहे C.F.A., चाहे डॉक्टर हो चाहे इंजीनियर हो, चाहे अमीर हो चाहे शहनशाह हो, वो...

( मूलाधार चक्र ध्यान की प्रक्रिया में से 1 से 6 क्रमांक तक ध्यान करने के पश्चात ) 7. फिर विचार कीजिए कि दूर क्षितिज से केशरी रंग की कोई चीज आ रही है। वह धीरे-धीरे निकट आ रही है, बड़ी हो रही है। वह केशरी...

कुछ दिन पहले समाचार के सभी माध्यमों में  (इलेक्ट्रोनिक मीडिया हो चाहे प्रिन्ट मीडिया हो या सोशल मीडिया हो) तीन दिनों तक लगातार एक खबर बहुत जोरो से ट्रेन्ड हुई।   एक दिन तो फ्रन्ट पेज पर भी वो खबर आ गई। वो खबर थी “गर्भवती हथिनी...

एक मंदिर का निर्माण कार्य शुरू था। किसी ने मजदूर को पूछा “तु क्या कर रहा है?“ उसने कहा “पत्थर फोड़ने की मजदूरी कर रहा हूँ“   दूसरे मजदुर से पूछा “तु क्या कर रहा हैं।” मजदूर ने कहा “पेट भरने के लिए मेहनत कर रहा हु।“   तीसरे...

पाप विपाक नामक प्रथम अध्ययन पर देशना फरमाने के उपरान्त परमात्मा वीर प्रभु ने द्वितीय अध्ययन का प्रारंभ किया।   इस जम्बू द्वीप के भरत क्षेत्र में वाणिज्यग्राम नामक एक नगर था। इस नगर के प्रजाजन अत्यंत समृद्ध व गगनचुम्बी महलों में निवास करते थे। सभी के...

अपनी 1 साल की 50,000 की पूंजी लेकर एक किसान ने मुम्बई की 5 स्टार होटेल में एक रात रहने का सोचा। अपना रौब जमाने के लिए सभी मित्रों को भी इस बात की जानकारी दी। अपनी ग्रामीण वेश-भूषा में धोती-पगड़ी पहनकर सज-धज कर आखिर...

जीवन में कभी भी अमृतपान न किया हो किन्तु फिर भी आम के रसास्वाद से जैसे अमृत की तृप्तता होती है, यथार्थ वैसे ही...

नौका चलाने वाला नाविक, बैलगाड़ी चलाने वाला किसान, स्कूटर, मोटर या ट्रेन चलाने वाला Driver, विमान चलाने वाला Pilot - ये सब यदि अनाड़ी हों, कार्यकुशल न हो ;   सेना का नायक, क्रिकेट टीम का कप्तान, किसी संस्था का संचालक या सेक्रेटरी, राजनैतिक पार्टी...

  (3) Mimicry : The third alphabet in the word ‘Family’ is ‘M’ and here M stands for Mimicry i.e simulation. Slavish imitation is negative imitation and assertive imitation is positive imitation. Chaggan was sitting in a bus. He had a company of a gentleman on another seat. Chaggan...

इस लेखमाला के प्रथम भाग में मार्गानुसारी के 35 गुणों में से पहले गुण ‘त्रिवर्गअबाधा’ का उल्लेख किया था। उसका अर्थ यह था कि धर्म-पुरुषार्थ, अर्थ-पुरुषार्थ एवं काम-पुरुषार्थ इन तीनों के मध्य ऐसा संतुलन बनाये रखना चाहिए कि तीनों में से किसी को भी बाधा...

‘महा’ अर्थात् विशाल और ‘भारत’ अर्थात् भरत के वंशज। इन्हीं भरतवंशीओं के पराक्रम एवं यशो गाथाओं के कारण यह हिन्दवी साम्राज्य भारत के नाम से विख्यात हुआ । महाभारत अर्थात्  महान, श्रेष्ठतम, सर्वोत्तम भारत या भरत के महान वंशजों का इतिहास, उनकी परम्परा की गाथा।...

(3) Mimicry :   Family शब्द का तीसरा अक्षर है M, और यहाँ M stands for Mimicry, यानी अनुकरण।   अंधानुकरण नेगेटिव मिमिक्री है और विवेकपूर्ण अनुकरण पॉज़िटिव मिमिक्री है।   छगन एक बस में बैठा था, पास की सीट पर एक जेंटलमेन आकर बैठा। छगन ने उसे देखा, मई का...

राजतापस के चेहरे पर आनन्द छा गया।   ‘देखो ! कितना सुन्दर बालक है। एकदम आप पर गया है।’ राजतापसी ने राजतापस को सद्यः प्रसूत बालक को दिखाते हुए कहा।   अनुभवी राजतापसी ने सम्पूर्ण प्रसूति कर्म पूर्ण किया। तदुपरांत रोते हुए बालक को स्तनपान कराने लगी। दूध पीकर...

प्रभु महावीर ‘सत्’ को जीने वाले थे। ‘सत्’ उनका जीवन-दर्शन था।   सत् का अर्थ है सत्य, और सत्य का अर्थ है ध्रुव।   जो ध्रुव नहीं है, वह पारमार्थिक सत्य भी नहीं है।   वह मात्र व्यावहारिक सत्य है….।   व्यवस्था संचालन के लिए व्यावहारिक सत्य आवश्यक है।   पारमार्थिक सत्य का व्यवस्था अथवा...

मोक्खेण जोयणाओ जोगो।   आचार्य श्री हरिभद्रसूरिजी म.सा. अपने ‘योग-विंशिका’ ग्रन्थ में कहते हैं कि योग वह है, जो आत्मा को मोक्ष से जोड़ता है।   भौतिक जगत में आत्मा और शरीर के जुड़ाव का माध्यम मन है। इस मन को शरीर से अलग करने का कार्य योग-ध्यान करता...

  सबसे पहले शान्त चित्त होकर पद्मासन या सुखासन में बैठें। फिर तीन मिनिट तक अनुलोम-विलोम करें। इसमें दाहिने हाथ के अँगूठे से दाहिनी नासिका बन्द करें, और बाईं नासिका से लें, फिर दाहिने हाथ की तर्जनी से बाईं नासिका बन्द करके दाहिनी नासिका से...

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