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मैं युधिष्ठिर पांच पाण्डवों और सौ कौरवों में सबसे ज्येष्ठ भ्राता हूँ। पुत्र के लक्षण पालणे में दिखाई दे जाते हैं। मेरा परिवार पुण्यशाली था और ऐसे परिवार में मेरे

एकबार के लिए मानिए कि आपकी वार्षिक आमदनी 10 लाख रूपये है, और पूरे वर्ष का कुल खर्च 8 लाख रूपये हैं। मतलब 2 लाख रूपये शुद्ध बचत है। पिछले

Jinshasan was established 2576 years ago by Tirthankar Shri Bhagwan Mahavir.   After so many years in the flow of time, we have attained the very rich and advanced life as a

अनन्तज्ञानी तीर्थंकर श्री भगवान महावीर के द्वारा आज से 2576 वर्ष पूर्व जिनशासन की स्थापना की गई थी ।   समय के प्रवाह में बहते बहते इतने वर्षों के पश्चात् अपने शुभ

एक दर्दनाक सत्यघटना से शुरूआत करते है

( पाटलिपुत्र आने के बाद नगर के प्रवेश के पूर्व एक भव्य प्रासाद को देखकर उस में प्रवेश कर किया । उस मंदिर के खंभे पर चित्र में अंकित स्त्री

( क्रमांक 1 से 6 तक मूलाधार चक्र ध्यान के मुताबिक ध्यान करने के पश्चात )   फिर विचार कीजिए कि दूर क्षितिज से गहरे नीले, Grey या Navy Blue रंग

नमस्ते मित्रों !   Faithbook के जरीए हम अरिहंत बनने की यात्रा में अग्रसर हो रहे हैं । दुनिया भर की और सभी पदवीयाँ, संपत्ति से, मेहनत से, बुद्धि से अर्जित की

सुबह पति जब तैयार होकर घर से बहार निकल रहा था, तब अंदर से उनकी श्रीमतीजी (पत्नी) आयी, उनके हाथ में केशर-बादाम-पीस्तावाला दुध रखा और पत्नी ने कहा “आप यह

Hello friends ! We are talking about 20 steps to be an Arihant. You probably know what Arihant is called. Otherwise, let me tell, those who have defeated all their enemies,

  "सहसा न विदधीत क्रियाम्, अविवेकः परमापदां पदम् ।  वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्घा: स्वयमेव सम्पद:।।"   छगन : अरे मगन ! तुम क्या कर रहे हो मगन : मैं कुछ भी नहीं करता

त्रिशलाराणी शंकित हो गये क्योंकी गर्भ का स्पंदन अब बंद हो गया है। जीवन की कल्पना स्पंदन से होती है जीवन का अनुभव तो निःस्पंद से मिलता है। त्रिशलाराणी के गर्भ में जो रचना

एक्स्ट्रा प्लॉट में कचरा एकत्र हो गया हो तो उसकी बुरी असर बंगले पर होती हुई स्पष्ट दिखाई देती है। रोज मिलने वाले दो-चार घण्टे के खाली समय का उचित

आज से वर्षों पहले यदि किसी व्यक्ति को विरोध करने का ज़ुनून सवार हो जाता था, तो वह गमुनाम बनें अपनी अन्तर्व्यथा रूप पत्रिकाएँ छपवाकर उनके गट्ठे व्याख्यान सभा, देहरासर

  Years ago, if a person had a passion to protest, then he without revealing his name would leave his printed interlude stories or subject matter in lecture halls or wherever
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