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Everything is Online, We are Offline 4.0

गत अंक में हमने इसी मंच से ऐलान किया था कि, आने वाला कल बहुत ही खतरनाक होने जा रहा है, जिसमें हमारा विकास के पीछे का पागलपन जिम्मेदार होगा।

 

आज इसी बात की जरा विस्तार से चर्चा कर लेते है। रिलायन्स ने कुछ दिनों पूर्व में एक घोषणा की थी, जरा गौर से उन घोषणा के शब्दों को सुना हो तो वह इस प्रकार थी ‘भविष्य का भारत देश मोबाइल नेटवर्क में क्रांति करने जा रहा है। भविष्य में आपके मोबाइल 5G नेटवर्क से लैस होंगे।’

 

ऐसी ही घोषणा वर्तमान की केन्द्र सरकार ने भी कुछ महीने पहले की थी। वाई-फाई क्रांति से देश को विकास के सपने दिखाने वाली सरकार को हमारा सिर्फ छोटा सा प्रश्न है कि, ‘क्या वाई-फाई क्रांति बिना 5G नेटवर्क के आने वाली है?’ और यदि इसका उत्तर ‘ना’ में है तो दूसरा प्रश्न यह है कि, क्या 5G नेटवर्क आरोग्य की दृष्टि से किसी को भी नुकसान पहुंचाए बिना काम करने वाला है?

 

दूसरे प्रश्न का उत्तर हम ही दे देते है (क्योंकि, आप का अब नये भारत में प्रवेश हो चुका है, जहाँ न्यायालय की आँखें, मीडिया का मुंह और सरकार के कान, गांधीजी के तीन बंदर की तरह बंद दिख रहे हैं।)

 

आपने गत साल चाइना के कुछ वीडियो देखे होंगे, जिसमें कोई बुजुर्ग व्यक्ति खड़े-खड़े ही गिर कर मरता हुआ दिखाई दे रहा है, या रोड़ के इर्द-गिर्द कुछ लोगों की लाशें बिखरी हुई दिखाई दे रही हैं। आपको ये सारे वीडियोज़, कोरोना की भयानक असर कैसी हो रही है या होगी, उसका आकलन करने के लिए बताये गये थे। हकीकत में वो कोरोना का कहर नहीं था, 5G नेटवर्क का फुल फ्रीकवेन्सी के साथ किया गया प्रयोग (Experiment) था, ऐसा हमारी जानकारी में आया है।

 

आप लोगों को डराकर घर में बंद रखने के साथ-साथ लॉकडाउन के दौरान 5G नेटवर्क की जाल बिछाने का कार्य भी भारत के शहरों में चालू कर दिया गया था।

 

कई स्थानों पर रात्रि कर्फ्यू के दौरान 5G नेटवर्क स्थापित करने का कार्य चालू था, ऐसा भी सुनने में आया है। (इसी हेतु से रात्रि कर्फ्यू लगाया गया हो, इसकी संभावना भी प्रबल है।)

 

आपको लगेगा कि, कोरोना से 5G का क्या रिश्ता है? कोरोना के नाम से जो डर बढ़ाना था वो डर बढ़ाने में 5G बड़ा उपयोगी सिद्ध हुआ है। चाइना में 5G नेटवर्क का प्रयोग बंद करने के तुरंत बाद मृत्यु दर कम हो गया। इन सारी जानकारियों के आधार पर ब्रिटेन इत्यादि में आक्रोशित जनता 5G के टावरों को सुपुर्द-ए-खाक कर रही है (यानी जला-जलाकर भस्म कर रही है।)

 

जिओ-मुकेश अंबानी के द्वारा गूगल के साथ पार्टनरशिप (साझेदारी) इसी हेतु से की गई है। भारत राष्ट्र में 5G को तेजी से फैलाने के लिए की गई यह साझेदारी आखिर कितने भयानक दुष्परिणाम लाने वाली है, इसका आम जनता को कहाँ पता है? थोड़ी गहराई में जाकर जानते हैं कि 5G का नुक़सान क्या है?

 

4G में 2.5 गिगाहर्ट्ज़ तक की फ्रीकवेन्सी का उपयोग होता है, मगर 5G में 60 गिगाहर्ट्ज़ की फ्रीकवेन्सी का उपयोग होता है। 10 लाख हर्ट्ज़ का एक मेगाहर्ट्ज़ और एक अरब हर्ट्ज़ का एक गिगाहर्ट्ज़ होता हैं।

 

जिसके चलते 5G नेटवर्क में डाटा ट्रान्सफर की गति बढ़कर 20 से 25 गुनी हो जाती है। डाटा ट्रान्सफर की गति तेज होने पर हमें बहुत खुशी मिलती है मगर, याद रहे अधिकांश हादसे एक्सप्रेस वे पर ही होते है। तेज गति तेजी से हमें मारने का काम करती है, यह निर्विवाद सत्य है।

 

5G की सबसे खतरनाक असर यह है कि, उसके भारी रेडिएशन (60 गिगाहर्ट्ज़) के कारण केन्सर के मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होना तय है। 4G का रेडिएशन दीवारों को और हमारे शरीर की चमड़ी को भेदकर आर-पार निकल जाता है, हमारे शरीर में रहता नहीं है मगर 5G के रेडिएशन को हमारा शरीर सोख लेता है, जिसके कारण हमारे शरीर के टेम्परेचर और DNA में परिवर्तन होने की संभावनाएँ बढ़ जाती है। अपने शरीर में यदि इतनी भारी मात्रा में रेडिएशन चला जाये तो केन्सर का मरीज़ बनना निश्चित है।

 

सूरज की किरणों के दृष्टांत से रेडिएशन के असर को समझने की कोशिश करेंगे। 

 

सूरज की किरणें यदि बिखरी हुई हो तो कागज जला नहीं सकती है मगर उन्हीं किरणों को यदि उत्तल के शीशे के माध्यम से एकत्रित किया जाये तो वह किरणें कागज इत्यादि में आग लगा सकती है।

 

4G तक हम थोड़े-बहुत भी सुरक्षित थे, मगर 5G के रेडिएशन हमारे शरीर के अंदरूनी कोषों को जलाकर भस्म करने की ताकत रखते है और इसी कारण से 5G के टावर भी कम अंतर में लगाने पड़ रहे है, क्योंकि 5G नेटवर्क अपना असीम प्रभाव, सीमित क्षेत्र में ही दिखा सकता है। जैसे सूरज की किरणें एकत्रित होकर सीमित क्षेत्र में रही चीजों को भस्मीभूत कर सकती है, ठीक वैसे ही 5G नेटवर्क का असर समझना चाहिए।

 

औरंगाबाद के डॉ. विलासजी जगडाले के घर के बाजू में 5G टावर का छोटा सा प्रतीकात्मक प्रयोग किए जाने पर, उस एरिया के कई घरों की घड़ियां चलनी बंद हो गई थी और डॉक्टर साहब के पास स्किन एलर्जी के अत्यधिक मरीज़ आने लगे। डॉ. विलासजी तो खुल्लेआम कह रहे है कि, यदि फुल फ्रिकवेन्सी में 5G नेटवर्क चालू किया गया तो भारत देश की 70 प्रतिशत आबादी चमड़ी के केन्सर से ग्रसित होगी और देखने की बात यह होगी कि हमें नुकसान पहुँचाने वाला शत्रु ही हमें नहीं दिख रहा होगा।

 

अभी तक होने वाली नेटवर्क क्रांति से चिड़िया ही गायब हुई है। (बर्ड फ्लू का असली कारण शायद रेडिएशन ना हो?) मगर अब होने जा रही नेटवर्क क्रांति (5G नेटवर्क) से तो शायद इंसान ही गायब हो जायेगा।

 

मेरी बात आपको हजम ना हो रही हो तो थोड़ी खोज आप भी कर लो। हमारे यहाँ मोबाइल का पूर्ण रूप से उपयोग तक सन् 2010 से होने लगा है (खासतौर पर सन् 2016 में जिओ आने के बाद से हुआ है) मगर स्वीडन जैसे देश में मोबाइल क्रांति सन् 1986 से चरम पर थी। उसी स्वीडन में मोबाइल के रेडिएशन के कारण EHS (इलेक्ट्रो हायपर सेंसिटिविटी) नामक रोग से पीड़ितों की संख्या सन् 2005 में ढाई लाख से अधिक थी। वे मरीज़ ऐसे थे, जिन्हें किसी के मोबाइल में बजने वाली घण्टी से भी वोमिटिंग सेन्सेशन (उल्टियाँ), चक्कर आने, बेहोश हो जाने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। कईं लोगों को तो अपना घर, अपना शहर छोड़कर जंगलों में रैनबसेरा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

 

भारत राष्ट्र में मोबाइल क्रांति, भले ही देरी से हुई है मगर 5G आने के पश्चात् स्वीडन जैसे हालात खड़े होने में बिल्कुल देर नहीं लगेगी।

 

वैसे भी 5G की स्पीड अकल्पनीय होगी। डाटा हो या मनुष्य, दोनों को यहाँ से वहाँ, यानी एक फोन से दूसरे फोन में डाटा और एक जन्म से दूसरे जन्म में मनुष्य को ट्रान्सफर होने में इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 

 

(अगले अंक में, 5G के बारे में और भी कुछ बातें आप से शेयर करेंगे, जो आपको जाननी बेहद जरूरी है।)

 

(हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हमारे पास बहुत महत्त्वपूर्ण लेख ‘खतरनाक वैक्सीन’ नाम से पड़े है, जिसे भी पढना हो हमें 9166568636 पर अवश्य सूचित करें।)

About the Author /

authors@faithbook.in

जिनशासन के लिए जोश और जुनून के साथ जिनकी कलम चलती है, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शासन और सत्य क्या है, इसकी जानकारी देने वाली लेखमाला पू. युवामुनि द्वारा लेखांकित हो रही है। धारदार, असरदार और कटार लेखक सबको निश्चय ही नया दृष्टिकोण देंगे और मनोमंथन के लिए विवश करेंगे।

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