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Everything is Online, We are Offline 5.0

गत अंक में हमने 5G नेटवर्क के दुष्परिणाम बतायें थे, मगर कईं लोगों को प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि, यदि इतने सारे दुष्परिणाम है तो सरकार पूरे देश में 5G नेटवर्क की जाल क्यों बनाना चाहती है? इससे सरकार को फायदा क्या है? और सबसे बड़ा प्रश्न तो यह है कि, सरकार के शीर्ष स्थान पर बैठें राजनेताओं या संपन्न उद्योगपतियों का इससे बचाव कैसे हो पायेगा, क्योंकि, 5G रेडिएशन के दुष्प्रभाव से तो वे लोग भी अछूते नहीं रह पायेंगे।

 

कोई भी इन्सान कितना भी लालची क्यों ना हो मगर मौत को गले लगाकर किसी भी तरह की सुविधा या भोगसुखों को भुगतना पसंद नहीं करेगा।

 

सभी प्रश्नों के उत्तर हम देना चाहेंगे, आप हम से जुड़े रहिए।

 

सबसे पहली बात यह है कि 5G नेटवर्क के इतने सारे दुष्परिणाम जानने के बावजूद सरकार इसे स्थापित करना चाहती है, इसमें ‘सरकार’ शब्द से ‘विश्व सरकार’ समझना चाहिए। अभी देश में बैठी हुई जो वर्तमान सरकार है वो तो 5/10 साल के लिये अस्थायी रूपसे बिठाई गई सरकार है।

 

उसके ऊपर बैठी सरकारें, इन्हें जो कहती है, वह इन्हें लागू करना होता है। मेरी बातों पर भरोसा ना बैठता हो तो, सन् 2021, 30 जनवरी के दिन संसद में मोदीजी के द्वारा दिए गये अभिभाषण को ध्यान से सुनने का जरूर कष्ट करें।

 

New World Order (नूतन विश्व व्यवस्था) के बारे में उन्होंने जो कुछ थोड़ा बहुत संकेत दिया, उसके बारे में हमने धर्मप्रेमी संदेश नामक मासिक पत्रिका में अगस्त-2020 को ही बता दिया था (शायद (तब) कुछ लोगों को मेरी बातें हास्यस्पद लग रही थी और आगे जो बातें मैं बताने वाला हूँ वे बातें भी कुछ लोगों को असंभव लगेगी…)

 

प्रथम और द्वितीय प्रश्नों का संक्षिप्त में यदि उत्तर देना चाहें तो सरकारें कार्यपालिका के द्वारा 5G नेटवर्क स्थापित इसलिए करना चाहती है, कि समस्त प्रजा को अपने नियंत्रण में रखा जा सके।

 

गत अंक में हमनें 5G नेटवर्क के कारण होने वाले शारीरिक दुष्परिणाम बताये थे। इस अंक में हम आर्थिक क्षेत्र पर इसके क्या दुष्परिणाम पड़ सकते हैं, वह बताने की कोशिश करेंगें। शास्त्रों में हकीकत में वह बात 100 प्रतिशत सही लिखी है कि, पैसा (अर्थ) गृहस्थों के लिए 11वां प्राण है और यदि गृहस्थों को नियंत्रित करना हों तो उनके अर्थ (रुपयों) को अपने नियंत्रण में लेना पड़ता है।

 

बिना पैसों वाले गृहस्थों की इस संसार में कोई कीमत नहीं होती है, कोई भाव नहीं पूछता है, कोई उसकी राय नहीं लेता है, और अपने लोगों की नजरों से सिर्फ पैसे नहीं होने मात्र से वह गिर जाता है। इसी हेतु से नीतिशास्त्रों में जगह-जगह पर गृहस्थों को अपना धन सुरक्षित रखने हेतु टिप्स दी गई है। नीतिशास्त्र के अनेक संदेशों में से एक महत्वपूर्ण संदेश ‘अपना धन अपने हाथ’ रखने का है। अपना धन किसी औरों के हाथों में दिये जाने के बाद उसे अपना मानना बेवकूफी कहा गया है। 

 

‘गरथ गांठे विद्या पाठे’

 

यह गुजराती कहावत भी इस में गवाही दे रही है। यहां एक व्यक्ति की बात छोड़ो, मगर समस्त जनता के धन पर अपना नियंत्रण करना हो तो?

 

रास्ता साफ है और उसी रास्ते पर अभी देश आगे बढ़ रहा है। आपने सन् 2008 में आई वैश्विक मंदी की बातें सुनी होगी। साथ में यह भी सुना था कि, भारत देश में उस मंदी की असर उतनी नहीं हुई, जितनी दूसरे देशों में हुई थी।

 

उस वक्त अमेरिका मंदी की चपेट में आने वाला और सबसे ज्यादा नुकसान करने वाला देश था। क्योंकि, सभी का धन बैंक में पड़ा था, और बैंक दिवालिया हो रही थी। भारत देश बच गया था, क्योंकि यहाँ की जनता के पैसे स्वयं के हाथों में थे, बैंक में नहीं थे।

 

इस भारत देश में भी अ धीरे-धीरे समस्त प्रजा को अपने कंट्रोल में लेने की कवायद शुरू हो चुकी है, हालांकि आतंकी एवं नक्सलवादियों की गतिविधियों को रोकने के लिए या अच्छा भी है, मगर सिक्के के जैसे दो पहलू होते हैं, वैसे इस प्रक्रिया का दूसरा पहलू भी है जो आपको जानना बहुत जरूरी है।

 

एक ऐसी माईक्रोचिप हरेक व्यक्ति के हाथों में यदि लगाई जाये कि, जिससे उनके सारे के सारे जीवन व्यवहार उसी से संचालित हो तो यह कैसा लगेगा? फिर आपको ना क्रेडिट कार्ड, ना डेबिट कार्ड, ना आधार कार्ड, ना राशन कार्ड, ना लाइसेन्स, ना अन्य कोई चीज़ रखनी पड़ेगी तो आप को वह चीज़ कैसी लगेगी ?

 

जी हाँ, RFID चिप के बारे में मैं बता रहा हूँ, जो भविष्य के भारत में आने वाली है। रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेन्टीफिकेशन चिप को ही RFID चिप कहा जाता है, जिसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन, अमेरीका इत्यादि विकसित देशों में हो चुकी है। 

 

सन्-2017 में ऑस्ट्रेलिया राष्ट्र अधिकृत रूप से माइक्रोचिपिंग करवाने वाला प्रथम राष्ट्र बन चुका है। अब तो चाईना इत्यादि में भी यह धड़ल्ले से चालू हो गया है, जिसके तहत हरेक नागरिक की बैंक अकाउंट की डिटेल उसी में रहती है और हरेक नागरिक अपने वित्तीय व्यवहार उसी के जरिये करने लगा है (या करने के लिये मजबूर किया जा रहा है।)

 

तर्जनी और अंगूठे के बीच वाले हिस्से में चावल के दाने जितनी छोटी माइक्रोचिप लगवाने के लिये छोटा सा ऑपरेशन करवाना होता है, जिसके पश्चात् आप अपना घर भी इसी उपकरण से लॉक-अनलॉक कर सकते हैं। बाहर शॉपिंग मॉल में खरीद-बिक्री इत्यादि सारे व्यवहार कर सकते हैंवन, आप अपने बच्चों को यह चिप लगवा कर उन पर भी नजर रख सकते हैं। आपका बेटा कहाँ जा रहा है? किसके साथ उठता-बैठता है? वहाँ पर क्या कर रहा है? वह सारी जानकारी आप दूर बैठे-बैठे भी प्राप्त कर सकते हैं, इत्यादि अनेक लाभ इस माइक्रोचिप से पा सकते हैं। ऐसा बताकर कईं लोगों को RFID लगवाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इसके नुकसान बताने से परहेज कर रही हैं जो हम बतायेंगे-

 

5G नेटवर्क, RFID चिप के लिये उपयुक्त भी है, अनिवार्य भी है अतः 5G नेटवर्क के लिये वर्तमान सरकारें उत्सुक भी है, लालायित भी।

 

आगे देखते है, RFID के नुकसान और संभावित लाभ क्या-क्या हो सकते है ?

(क्रमशः)

About the Author /

authors@faithbook.in

जिनशासन के लिए जोश और जुनून के साथ जिनकी कलम चलती है, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शासन और सत्य क्या है, इसकी जानकारी देने वाली लेखमाला पू. युवामुनि द्वारा लेखांकित हो रही है। धारदार, असरदार और कटार लेखक सबको निश्चय ही नया दृष्टिकोण देंगे और मनोमंथन के लिए विवश करेंगे।

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