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भारत देश में रहने वाले लोगों को आज तक ऐसा लग रहा था कि, हम प्रजा हैं और राजा हमारे सुखों के लिए प्रतिबद्ध है।

 

राजा वह होता है, जो प्रजा को प्रसन्न रखने के लिए प्रयत्नशील होता है। प्रजा को सुखी देखना चाहता है वह राजा होता है। और गुलाम वह होता है, जो अपने मालिक को प्रसन्न रखने के लिए प्रयास करता है। जो अपने मालिक को खुश करने के लिए जान तक दे दे, वह गुलाम होता है। जो अपनी प्रजा को सुरक्षित रखने के लिए जान न्यौछावर कर दे वह राजा होता है।

 

वर्तमान में जो भी लोग से शीर्ष पदों पर आसीन हैं, वे सब राजा हैं या मालिक ? और हम प्रजा हैं या गुलाम ? इस बारे में अधिकांश लोग असमंजस में हैं।

 

उलझन इसलिए भी है, क्योंकि हमारी सुविधा की बातें करके जो काम किये जा रहे है, उस से आखिर हमारी दुविधा ही बढ़ रही है।

 

पहली बार ऐसी बीमारी ने इस विश्व में दस्तक दी है, जिसमें दवाई लेने वाले मर रहे हैं और दवाई से दूर भागने वाले अच्छे हो रहे हैं।

 

खुली हवा में साँस लेने की आजादी भी अब हमारे हाथों से छीनी जा रही है। हमने इतनी गुलामी सन्-1947 से पहले भी कभी सुनी नहीं थी या इतिहास में पढ़ी नहीं थी।

 

एक काल्पनिक डर खड़ा करके वास्तविक प्रतिबंधों की जंजीरों से प्रजा, गुलाम में तब्दील होती जा रही है, और भीष्म पितामह जैसे सज्जन, प्रबुद्ध और परिपक्व लोग खामोशी से तमाशाबीन बनकर चीरहरण देख रहे हैं।

 

प्रजा नामक द्रौपदी आज चीख रही है, चिल्ला रही है, शरण मांग रही है, डर से कांप रही है, क्रोध से लाल हो रही है, मगर आश्चर्य की पराकाष्ठा देखो, निरंकुश दुर्योधन और निर्लज्ज दु:शासन भविष्य के महाभारत का बीजारोपण करते ही जा रहे हैं।

 

वेब सीरीज़ में धर्मस्थानों में शूटिंग किये गये भद्दे दृश्य दिखाये जाने पर भी पांडव जैसे शक्तिशाली चुप हैं। लॉकडाउन से छोटे दुकानदारों, मजदूरों को पसीने की कमाई से प्राप्त होने वाली रोटी छीनकर भिखारी बनाने की साजिश पर भी सभी चुप हैं। निर्दोष लोगों के बेमतलब के चालान काट-काटकर जेब भरने वाले लुटेरों को देखने के बाद भी शिष्ट पुरुष चुप हैं। बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने के नाम से वीडिओ गेम, जुआ इत्यादि की लत लगाने पर भी अभिभावक खामोश हैं।

 

मालिक जो भी करे, सब कुछ (न्याय-अन्याय) स्वीकार कर लेना गुलाम का नैतिक धर्म होता है और इसी गुलामी की जब आदत हो जाती है तब तो मालिक हमेशा-हमेशा के लिए निश्चिंत हो जाता है।

 

वे लोग लाखों लोगों की चुनाव रैली करें तो भी आप कोर्ट में शिकायत नहीं कर सकते, मगर हम यदि मंदिर खोलने की बात करें तो हमें डराया जाता है, क्यों ? क्योंकि वो मालिक है और हम गुलाम !!!

 

मालिक की प्रसन्नता के लिए अपनी जान भी कुर्बान कर दें तो भी कम ही है। गुलाम को शिकायत करने का नहीं, मालिक के खिलाफ सोचने का भी अधिकार नहीं है ?

 

कमाल… कमाल… कमाल…

 

कुम्भकर्ण की नींद में से जागो, इन लोगों की चाल समझो, आप उनकी चुनावी रैलियों की शिकायत करेंगे तो भी फसोगे। ये लोग तो बोल देंगे, चलो, कोरोना फैल रहा है तो आप की बात भी मान ली जाये, वर्चुअल वोटिंग करवायेंगे। आप मतदान के लिए भी घर से मत निकलिए। आप घर की जेल में ही बंद रहिए, मोबाइल से ही वोट डाल दीजिए, जिस पार्टी को वोट देना चाहो, दे दो, हम मतगणना करवा लेंगे। 

 

बाद में तो आप की वोट बेंक का भी कोई अर्थ नहीं बचेगा। सब कुछ ऑनलाईन, चुनाव भी ऑनलाईन। भारत राष्ट्र की जनता बेचारी, भोली-भाली, पहले मुगलों ने लूटा, फिर अंग्रेजों ने लूटा, अब देशी अंग्रेज लूट रहे है।

 

हमने पिछले दो अंक में RFID माइक्रोचिप के बारे में आप को अवगत कराया था। हमें भी कल्पना नहीं थी, कि ये लोग इतनी जल्दी में हैं।

 

13 अप्रैल-2021 के दैनिक भास्कर के पेज पर आई खबर ने मुझे चौंका दिया, क्योंकि उसमें लिखा था कि, ‘पेंटागन के वैज्ञानिकों ने बनाई शरीर में लगने वाली माइक्रोचिप, यह वायरस को पहचानेगी, फिर खून से फिल्टर करके निकाल देगी।’ चिप त्वचा के नीचे लगेगी। इस नई तकनीक को डिफेंस एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी (DARPA) ने विकसित किया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी माइक्रोचिप और तकनीक विकसित की है, जो आपके शरीर में रहे कोरोना के लक्षण को पहचान लेगी और बाद में फिल्टर के जरिए खून से वायरस को निकाल लिया जाएगा।

 

इसे बनाने वाली टीम के प्रमुख महामारी विशेषज्ञ रिटायर्ड कर्नल डॉ. मैट हैपबर्न ने यह दावा भी किया कि कोविड-19 अंतिम महामारी होगी। अब हम भविष्य में किसी भी प्रकार के जैविक और रासायनिक हमले से बचाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

 

डॉ. हैपबर्न ने टिश्यू जैसा जैल दिखाते हुए बताया कि यह माईक्रोचिप में रहेगा और इसे इस तरह बनाया गया है कि यह खून की लगातार जांच करके रिपोर्ट देगा। आप जहां है, वहीं आप अपने खून की जांच कर सकते है। इसका रिजल्ट भी 3 से 5 मिनट के अंदर आपको मिल जाएगा।

 

अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने इस मशीन को (जो चिप से वायरस का पता लगाने पर खून से उसे हटाने का काम करता है) ‘आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है।’

 

इस खबर से इतना तो पक्का पता लग गया कि, हमें पूर्ण रूप से गुलामी की गर्त में धकेलने के लिए बहुत बड़ा आयोजन हो चुका है। एक डिफेंस (रक्षा विभाग) से जुड़ा वैज्ञानिक, हेल्थ (स्वास्थ्य) विभाग के वैज्ञानिक की तरह कैसे बयान दे सकता है ? और वो ऐसा दावा कैसे कर सकता है कि, कोविड-19 अंतिम महामारी होगी ? गुलामी से बड़ी बीमारी कोई नहीं है। गुलामी आने के बाद आप को कोई महामारी भी महामारी के रूप में महसूस नहीं होगी शायद इसीलिए वे लोग अपने बर्ताव से कह रहे हैं कि, या गुलामी पसंद करनी होगी या फिर मृत्यु नामक महामारी।

 

यदि कोई माईक्रोचिप लगवाने से इंकार कर दे तो ?

 

तो भी इन लोगों के पास कईं सारे रास्ते हैं आप को गुलाम बनाने के लिए। माईक्रोचिप लगाने के लिए कईं सारे मूर्ख लोग तो दौड़ पड़ेंगे। 

 

सब से पहले मैं…  

 

मगर यदि कुछ प्रबुद्ध लोग रुक कर इनके खेल को सूक्ष्म दृष्टि से देखने का, समझने का प्रयास करेंगे, या रोकने का प्रयास करेंगे उस से पूर्व तो वे लोग सबको इस प्रकार बाध्य कर देंगे कि यह सभी को लगाये बिना चलेगा ही नहीं।

 

क्योंकि जो काम अक्ल से नहीं हो सकता, वह काम बल से हो जाता है।

 

वो बल चाहे धनबल हो, धूर्तबल हो, शस्त्र बल हो या अन्य कोई भी प्रकार का बल हो। उन लोगों के पास ये सारे बल हैं। हमारे पास इन दुष्टों से बचने के लिए अब सिर्फ एक ही बल बचा है,

 

और वह है धर्मबल।

 

 (क्रमश:)

About the Author /

authors@faithbook.in

जिनशासन के लिए जोश और जुनून के साथ जिनकी कलम चलती है, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शासन और सत्य क्या है, इसकी जानकारी देने वाली लेखमाला पू. युवामुनि द्वारा लेखांकित हो रही है। धारदार, असरदार और कटार लेखक सबको निश्चय ही नया दृष्टिकोण देंगे और मनोमंथन के लिए विवश करेंगे।

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