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माइक्रोचिप के बारे में विगत कईं महीनों से लिखे आलेखों के बीच इस महीने आई एक खुशखबरी से आपको अवगत कराना चाहूँगा।

 

अमेरिका का इण्डियाना 11वां स्टेट बन गया है, जिसने अपने राज्य में माइक्रोचिप को प्रतिबंधित कर दिया है। इससे पहले

 

1) आर्कन्सास

 

2) केलिफ़ोर्निया

 

3) मसूरी

 

4) मोन्टाना

 

5) नेवाड़ा

 

6) न्यू हैम्पशायर

 

7) नॉर्थ डाकोटा

 

8) ओक्लाहोमा

 

9) उटाह

 

10) वीस्कोंसीन ऐसे 10 स्टेट अपने यहाँ RFID (माइक्रोचिप) को अवैध घोषित कर चुके है।

 

हुआ यूँ कि, कुछ निजी कंपनियों ने अपने वर्कर्स को नौकरी के लिए माइक्रोचिपिंग अनिवार्य कर दिया था, जिसके कारण अनेक कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ना पसंद किया था, बजाय माइक्रोचिप अपने हाथ में लगवाना। 

 

हजारों लोगों की नौकरियाँ कंपनियों की दादागिरी के कारण जब जाने लगी तो मामला शीर्ष अदालतों में भी पहुँचा और आखिरकार कोर्ट के आदेश से इन 11 राज्यों में माइक्रोचिपिंग बंद करना पड़ा।

 

कंपनी का कहना था कि माइक्रोचिप का उपयोग सिर्फ कंपनी की केन्टीन में खाना ऑर्डर करने, हाजरी लगाने और कंपनी की बिल्डिंग में काम करने में ही हो रहा है। मगर कानूनविदों ने जब पूछा कि, काम खत्म होने के बाद घर पर रह रहे वर्कर्स का डाटा कौन उपयोग में ले सकता है, और इसका फायदा कौन उठा सकता है ?

 

तो इसका जवाब कंपनी वाले नहीं दे पाये। आखिर कंपनी वाले बेकफूट पर आ गये। यदि इसी तरह पूरा विश्व जग जाएगा तो इन लोगों की योजनाएँ ध्वस्त हो जाएगी।

 

दूसरी महत्त्वपूर्ण जानकारी भी आपसे शेयर करना चाहूँगा। जून, 2019 में स्वीट्जरलैंड की सरकार ने 2000 लोकेशन पर 5G के एन्टेनास को टावर पर लगा दिये। 2000 लोकेशन पर लगाने के पश्चात् उन टावरों के आजू-बाजू रहने वाले लोगों की दिक्कतें अप्रत्याशित रूप से बढ़ गईं।

 

  •  कानों में तेज-तेज रिंगिंग बेल बजने की आवाज सुनाई देने लगी।

 

  •  इन्टेन्स हैडेक (भयानक सरदर्द)

 

  •  कानों में असहनीय दर्द

 

  •  बेचैनी

 

  •  थकावट

 

  •  Insomnia

 

ऐसी-ऐसी समस्याओं से पूरे के पूरे परिवार, कोलोनी, एरिया के अनेक लोगों की दौड़ डॉक्टर्स की ओर चालू हो गई।

 

सभी प्रकार के टेस्टिंग का एक ही नतीजा आया। सभी डॉक्टर्स का यही कहना था कि, 5G में से निकले माईक्रोवेक्स अथवा EMF (Electro Magnetic Field) के कारण ही ये सारी समस्याएँ पैदा हुई हैं।

 

आखिरकार लोगों ने ओथोरिटिज को कॉल किया तो वहाँ से जवाब मिला, हम 5G को बंद नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह सब कुछ लीगल (अधिकृत) है और कायदे के विरुद्ध हम कुछ भी नहीं कर सकते।

 

इसे Legal Mass Genoside (अधिकृत सामूहिक नरसंहार) नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे ?

 

October 2019 आते-आते तो स्वीट्जरलैंड में भयानक विरोध और आंदोलन शुरू हो गये। हजारों की तादाद में लोग स्विस पार्लियामेंट तक पहुँचने लगे। सरकार को भी आखिर झुकना पड़ा और फरवरी 2020 आते-आते स्विस सरकार को 5G एन्टेना के काम पर रोक लगानी पड़ी।

 

यूरोप और अमेरिका जैसे हर बड़े विकसित देशों में वैज्ञानिकों एवं डॉक्टर्स ने मिलकर अपने देशों के प्रमुखों को पत्र लिखकर 5G नेटवर्क के प्रयोगों को तुरंत बंद कर देने का अनुरोध किया है।

 

ब्रसेल्स एवं बेल्जियम 5G पर रोक लगाने वाले प्रथम देश बन गये है। [Devonshire, U.K. halts the installation of 5G over serious health concerns] आपको प्रश्न उठेगा कि, आखिर सरकार इसे इतना हानिकारक जानने के बावजूद क्यों अनुमति दे रही है ?

 

अमेरिका की ही बात देख लेते हैं। सन् 1998 से सन् 2018 तक टेलिकम्युनिकेशन की चार बड़ी-बड़ी कंपनियाँ, 1) AT&T 2) Verizon 3) Comcast 4) Charter और दूसरी टेलीकॉम कंपनियो ने लोबींग (समर्थन जुटाव) के लिए सरकार की जेब में 1.2 बिलीयन डॉलर्स डाले।

 

अकेले सन् 2018 में ही 80 मिलियन डॉलर्स इस के लिए खर्च किए गये।

 

अपनी फेवर में पोलिसी बनाने के लिए फार्मा कंपनी सबसे ज्यादा पैसे खर्च करती रही है, मगर अब इस में टेलीकॉम कंपनियाँ भी जुड़ चुकी हैं।

 

मोबाइल रेडिएशन (विकिरण) की सबसे बुरी असर 5 साल तक के बच्चों के दिमाग पर पड़ती है। इसी के चलते 2015 में फ्रांस की सरकार ने सभी नर्सरी स्कूलों में Wi-Fi को प्रतिबंधित कर दिया था।

 

और एक स्टडी पर गौर करने जैसा है। विगत 40 सालों में अमेरिका, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन इत्यादि विकसित देशों में Male sperm count (पुरुष वीर्याणु) बहुत कम होते जा रहे हैं, और मोबाइल क्रांति (रेडिएशन क्रांति) भी विगत 40 साल से ही बढ़ती रही है।

 

Central European journal of urology की एक स्टडी यहाँ पर प्रस्तुत है। 32 पुरुषों का Group-A और 32 पुरुषों का Group-B बनाया गया। दोनों ग्रुप के स्पर्म काउन्ट को लेकर 5 घंटे तक इनक्यूबेशन में रखा गया। ग्रुप-A में कोई भी रेडिएशन नहीं दिया गया मगर ग्रुप-B में विर्याणु को रेडिएशन दिया गया। मोबाइल टोप मोड पर रखा गया।

 

दो परिणाम स्पष्ट रूप से देखने में आये, 1) ग्रुप-A के विर्याणु की तुलना में ग्रुप-B के वीर्याणु में वृद्धि बहुत ही कम हो गई। 2) ग्रुप-A के वीर्याणु में DNA बिल्कुल भी विभाजित नहीं हुए मगर ग्रुप-B के विर्याणु में DNA fragmentation बहुत ज्यादा हुआ।

 

बातें सिर्फ 5G की ही नहीं है। बातें उन से आने वाली अनेकविध समस्याओं की भी है। रेडिएशन और EMF (इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड) के अनेक दुष्परिणाम सामने आ चुके है। मोबाइल पैंट की जेब में रखे तो बांझ होने का खतरा, शर्ट की जेब में रखे तो दिल को नुकसान और कान पर लगा के बात करें तो दिमाग को हानि पहुँचना तय है। कईं लोग तो सोते वक्त भी मोबाइल नजदीक रखते हैं जैसे एक माँ  छोटे बच्चे को साथ लेकर सोती है, वैसे ही मोबाइल को प्यार से साथ लेकर सोते है।

 

मोबाइल से मिलने वाली सुविधा की गद्दी में नींद भले ही अच्छी आ रही हो, मगर सभी नींद अच्छी नहीं होती है। जागना अनिवार्य है। 

 

जब जागना जरूरी हो, तब देर से जागने वाले के पास सिर्फ पछतावा ही बचता है, और कुछ भी नहीं। 

 

[अगले एपिसोड में 5G के कारण हिंदुस्तान के कुछ गांवों में कुछ लोगों को क्या-क्या नुकसान झेलना पड़ा, उसकी ग्राउंड रिपोर्ट कुछ तथ्योंके आधार पर बताने की कोशिश करेंगे।]

 

 

(क्रमश:)….

About the Author /

authors@faithbook.in

जिनशासन के लिए जोश और जुनून के साथ जिनकी कलम चलती है, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शासन और सत्य क्या है, इसकी जानकारी देने वाली लेखमाला पू. युवामुनि द्वारा लेखांकित हो रही है। धारदार, असरदार और कटार लेखक सबको निश्चय ही नया दृष्टिकोण देंगे और मनोमंथन के लिए विवश करेंगे।

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