Career & Character

“प्रत्यहं प्रत्यवेक्षेत, नरश्चरितमात्मनः।

 

किं नु मे पशुभिस्तुल्यं, किं वा सत्पुरुषैरिति ।।”

 

जगत में देखने वाले लोग बहुत हैं, जगत को (पर को) देखने वाले लोग भी बहुत हैं, किन्तु निरीक्षण करने वाले लोग कम हैं। इसके  अलावा स्वयं का निरीक्षण करने वाले तो और भी कम हैं।

 

यहाँ देखने का अर्थ है ऊपरी तौर पर देखना, और निरीक्षण का अर्थ है सुक्ष्मता से, बारीकी से देखना, गहराई से समझना।

 

दुनिया बहुत देख ली, अब स्वयं का निरीक्षण करने की जरूरत है। Self-Examination करने वाला अपने Future ( भविष्य ) को Bright ( उज्जवल ) अवश्य बनाता है।

 

उपरोक्त सूत्र में सुभाषितकार कहते हैं कि, प्रत्येक व्यक्ति को अपने चरित्र (Character) का प्रतिदिन निरीक्षण करना चाहिए।

 

आज के समय में अधिकांश लोगों की नजर Career की तरफ है, Character ( चरित्र ) की तरफ नहीं। किन्तु अपने Mind में इतनी बात स्पष्ट रूप से set कर लीजिए कि,

 

Career = Light of Candle, यह कुछ समय बाद स्वतः बुझ जाएगी।

 

Character = Light of Diamond, सदैव स्थिर रहेगा, झिलमिलाता रहेगा।

 

Character अच्छा या बुरा हो सकता है, मेरा Character पशु जैसा है या सज्जन जैसा, इस बात का रोज निरीक्षण करना है।

 

पुराण में एक मजेदार बोधकथा दी हुई है:

 

एक बार नारद जी की इच्छा हुई कि स्वयंवर में राजकुमारी मुझे वरमाला पहनाए। सबसे अधिक सुन्दर दिखने के लिए वे विष्णु जी के पास गए और उनके रूप की याचना की। नारद जी के मोह को दूर करने के लिए विष्णु जी ने उन्हें बन्दर का रूप दिया। अब नारद जी को लगा, कि स्वयंवर में सबसे सुन्दर वे ही हैं, किन्तु वहाँ बैठे सब लोग उनकी मजाक उड़ाने लगे।

 

राजकन्या को आकर्षित करने के लिए नारद जी ने अनेक प्रयास किए, किन्तु राजकन्या ने उनका वानर रूप देखकर उनका तिरस्कार किया, अन्ततः नारद जी पूरी सभा में मूर्ख कहलाए। जब नारद जी ने अपना चेहरा पानी में देखा तो पता चला कि वे तो बन्दर जैसे दिख रहे हैं।

 

हमने भी अपने आप को जो मान लिया, क्या हम वैसे ही हैं? हृदय के आईने में निष्पक्ष भाव से अपने आप का निरीक्षण कीजिए, अपने अन्दर छिपी हुई पशुता आपको दिखेगी। आपको अपना सच्चा आन्तरिक स्वरूप दिखाई देगा।

 

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग Chellenges आते हैं, किन्तु सबके लिए First and foremost challenge यह है, कि “Know Yourself” ( खुद को पहचानो )

 

सन्त एरिस्टोटल ने इसी सन्दर्भ में कहा है, “Knowing yourself is beginning of the wisdom.

 

Business का क्षेत्र हो, Political क्षेत्र हो, Social क्षेत्र हो या धर्म-अध्यात्म का, everywhere self-examination is most necessary.

 

यह self-examination हमारी life कार को right way पर आगे बढ़ाने का green signal है।

यह self-examination हमारी life कार को wrong way पर आगे जाने से रोकने का red signal है।

यह self-examination हमारी wrong way जा चुकी कार को वापिस लाने का reverse gear है।

यह self-examination हमें great success दिलाने का super secret है।

यह self-examination हमारी life कार को right way पर आगे बढ़ाने का green signal है।

यह self-examination हमारी life exam में top करने का superior lesson है।

इस Self-Examination के कारण:

 

  • स्नान करती युवती को विकार की दृष्टि से देखने वाला नरेन्द्र नामक युवक पवित्र, ब्रह्मचारी, ओजस्वी वक्ता और संस्कृति रक्षक स्वामी विवेकानन्द बना
  • पूरे जंगल को जलाकर खाक करने वाला, अनेक मानवों, पशु-पक्षियों को मारने वाला चण्डकौशिक सर्प स्वर्गगामी बना

 

ऐसे अनेक Examples देखने को मिलते हैं।

 

आइए, Self-Examination के द्वारा अपने Character को Pure Gold जैसा शुद्ध बनाएँ।

 

Turn your mind, turn your life, turn your future.

 

About the Author /

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प्राचीन साहित्यों में तीन चीजों को रत्न की उपमा दी गई है, जल, अन्न और सुभाषित। इनमें से सुभाषित रत्न का जगमगाता प्रकाश पू. मुनि भगवन्त हमारे समक्ष लेखमाला के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।संस्कृत से संस्कृति का सन्देश देने वाला यह लेख युवावर्ग बड़े चाव से पढ़ेगा।

1 Comment

  • Nee Shah
    June 16, 2020

    Awesome article, which motivates to self introspect!!

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