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परिवार की शोभा

(3) Mimicry :

 

Family शब्द का तीसरा अक्षर है M, और यहाँ M stands for Mimicry, यानी अनुकरण।

 

अंधानुकरण नेगेटिव मिमिक्री है और विवेकपूर्ण अनुकरण पॉज़िटिव मिमिक्री है।

 

छगन एक बस में बैठा था, पास की सीट पर एक जेंटलमेन आकर बैठा। छगन ने उसे देखा, मई का महीना, तपी हुई बस, उसने शर्ट पर टाई और ऊपर कोट पहना हुआ था और पूरा शरीर पसीने से लथपथ था। छगन ने उससे पूछा, “ऐसी गर्मी में सूट और टाई क्यों पहना?” उस जेंटलमेन ने तुनक कर जवाब दिया, “गर्मी यहाँ होगी, पर इंग्लैण्ड में तो ठण्डी है न ?” छगन को अपनी भूल समझ में आ गई।

 

कुछ भूल ऐसी होती है, जिन्हें सुधारना उससे भी बड़ी भूल है। We are talking about negative mimicry. आपके पड़ोसी अपने बेटे को DPS में डालकर खुश होते हैं, और आपको भी अब उसी रास्ते पर चलना चाहते हैं, यही negative mimicry है। आपके दूसरे पड़ोसी अपनी बेटी को वीभत्स कपड़े पहनाते हैं, और यह देखकर आपको भी यही पागलपन सूझता है, यही negative mimicry है। आपके जेठ बैंकॉक गए, इसलिए आपको भी अपने संस्कारों का अग्निदाह करना है, इसी का नाम negative mimicry है। आपकी बहन के ससुराल में हर कमरे में सेपरेट टीवी है, उसे देखकर आपको भी लगानी है, इसका नाम negative mimicry है। आपकी देवरानी ने कपड़े पहनने में छूट ली, देखा-देखी में आपको भी छूट मिलनी चाहिए, इसे ही negative mimicry कहते है।

 

फैमिली को डुबाना हो तो नेगेटिव मिमिक्री पर्याप्त है। लेकिन फैमिली बचाने के लिए पॉज़िटिव मिमिक्री की जरूरत होती है।

 

एक कन्या ने विवाह से पूर्व एक शर्त रखी कि मुझे कन्दमूल का त्याग रहेगा और नियमित चौविहार रहेगा। वह ख़ुद तो कन्दमूल नहीं खाती, किन्तु ससुराल में धर्म के कोई संस्कार नहीं थे, इसलिए कईं बार उसे बनाना पड़ता था।

 

वह कन्या दोपहर को ससुराल से एक घण्टे के लिए निकलती थी। उसका बाकी सब व्यवहार अच्छा था, उसकी सेवा, विनय, विवेक की सभी लोग प्रशंसा करते थे। बस इस घण्टे में वो कहाँ जाती है, यह किसी को नहीं पता था।

 

श्वसुर को चिन्ता हुई, पूछा, तो वह बोली, “सहेली के यहाँ जा रही हूँ।” श्वसुर होशियार थे, पूरी छानबीन की, फिर एक दिन सभी घर वालों को इकट्ठा किया, और भीगी पलकों से बोले, “हमने शर्त स्वीकार करते हुए इसे अपने घर की बहू बनाया, किन्तु हमने इसकी शर्त का पूरा पालन नहीं किया। सप्ताह में २-३ बार इसे कन्दमूल बनाना ही पड़ता है, और इस पाप के दण्ड के स्वरूप यह उस दिन भोजनशाला जाकर आयम्बिल करती है। भूल हमारी है, किन्तु प्रायश्चित्त ये उठा रही है। अब सब लोग बोलो, हमें क्या करना चाहिए?” सबने सर्वसम्मति से कन्दमूल का त्याग किया।

 

श्वसुर ने घर की तिजोरी की चाबी बहू को सौंपी, सबको बहू का कहा मानने के लिए कहा, बहू ने संकोच के साथ चाबी स्वीकार की, और कहा कि सबको सुबह उठते ही पहले प्रभु दर्शन करने हैं। इस प्रकार सबको दर्शन में जोड़ा, एक महीने के बाद सबको पूजा में जोड़ा और दो महीने के बाद सबको व्याख्यान में जोड़ा।

 

अनुकरण करना हो, तो इस बहू का करो। This is positive mimicry.

 

एक माता-पिता ने निर्णय किया कि हमारा बेटा स्कूल-कॉलेज की सीढियाँ चढ़कर अपना चारित्र नष्ट करे, यह हमें जरा भी स्वीकार नहीं है। इसलिए वे उसका इहलोक और परलोक सुधरे, ऐसी शिक्षा घर पर ही दे रहे हैं। अनुकरण करना है तो इनका करो। This is positive mimicry.

 

एक युवक ने NRI कन्या से सगाई करते समय उससे कहा कि, “जब तक तेरे 5 प्रतिक्रमण, 9 स्मरण, 4 प्रकरण और 6 कर्मग्रन्थ नहीं होते, तब तक हम शादी  नहीं करेंगे। अनुकरण करना है तो इनका करो। This is positive mimicry.

 

                मीडिया और टीवी चैनल्स के आतंक को देखकर एक माता-पिता ने अपने घर में टीवी, नेट और अख़बार बन्द करवा दिए। अनुकरण करना है तो इनका करो। This is positive mimicry.

 

Sorry to say, कि आजकल आप लोगों का अनुकरण बन्दर और भेड़चाल जैसा हो चुका है। इसलिए अब भले ही आपके स्वजन का सर कट जाए, या पूरा घर की कुएँ में गिर जाए, आपको कोई फर्क नहीं पड़ता। आप लोगों में से अधिकतर लोग विक्षिप्त और मूर्ख बनकर Negative Mimicry को ही अपनी लाइफ स्टाइल बना चुके हैं। Please, यह भी एक प्रकार का mental disease है, छोड़ दीजिए इसे।

 

(4) Immencity :

 

Family शब्द का चौथा अक्षर है I, और यहाँ I stands for Immencity, यानी विशालता। आप पैसे कमाते हैं, इसलिए आप बड़े हैं, आप सबका पालन कर रहे हैं इसलिए सबको आपका सम्मान करना चाहिए, सर पर उठाकर रखना चाहिए – यदि आप ऐसा सोचते हैं तो रुकिए, आप अन्धकार में हैं। आप भले ही परिवार के लिए लाख हाथ-पैर मारो, किन्तु यदि आपका हृदय विशाल नहीं है, तो सब व्यर्थ है, और आपके किए-कराए पर पूरा पानी फिर जाएगा।

 

यथार्थ में परिवार किसे कहते हैं? व्यक्ति कौन है? पूर्व जन्मों में किए गए पुण्यपाप एवं ऋणानुबन्ध के कारण एक व्यक्ति किसी परिवार विशेष का सदस्य बनता है। उस परिवार की हजारों पीढ़ियों से चले रहे अनुवांशिक गुणदोष उस व्यक्ति में भी आते हैं। सांसारिक तामझाम, भौतिकवाद और उपभोक्तावाद की दौड़ में मनुष्य अपने पूर्व के सत्संस्कार और अपनी हजारों पीढ़ियों के सत्संस्कार खो देता है, और इसका असर आने वाली हजारों पीढ़ियों पर पड़ता है। आप जब बिगड़ते हैं, तो सिर्फ आप ही नहीं साथ में आपका पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र आदि हजारों पीढ़ियाँ ख़राब होती हैं।

 

एक राजा था, उसके पास एक अनजान युवक नौकरी करने के लिए आया। राजा ने उसकी योग्यता पूछी, तो वह बोला, कि मैं अपने दिमाग का इस्तेमाल करके मुश्किल से मुश्किल प्रश्न का हल निकाल सकता हूँ। राजा ने उसे अपने घोड़ों के अस्तबल की जवाबदारी दी। कुछ दिनों के बाद राजा ने उससे अपने प्रिय और महँगे घोड़े के बारे में पूछा, तो उस युवक ने जवाब दिया कि, “यह घोड़ा असली नहीं है।” राजा ने छानबीन करवाई तो पता चला कि घोड़े की नस्ल तो सही थी, किन्तु जन्म के साथ उसकी माँ की मृत्यु होने के कारण वह गाय का दूध पीकर बड़ा हुआ था।

 

I tell you, हमारी भी नस्ल तो असली ही है, हमारी वंश परम्परा में दरियादिल महापुरुष हुए हैं, किन्तु हमने अपनी खुद की माता को छोड़कर मीडिया को धाय बना रखा है। टीवी के विचित्र चैनल्स और हलाहल ज़हर जैसे वीभत्स इंटरनेट को पुष्ट कर रहे हैं, परिणाम क्या? हृदय संकुचित हो रहा है, मन संकुचित हो रहा है, हाथ संकुचित हो रहा है, जीवन संकुचित हो रहा है, सम्बन्ध संकुचित हो रहे हैं, और भविष्य गर्त में जा रहा है। बालक भूख के मारे रोए, यह चिंता की बात हो सकती है, किन्तु ऐरेगैरे का दूध पिए यह बड़ा नुकसान है। हम इतने मूर्ख हैं कि माँ सामने बैठी है, माँ हमारे साथ ही है, माँ अपने वात्सल्य का झरना बहाने को तत्पर है, किन्तु हम कहीं और ही वात्सल्य ढूंढ रहे हैं।

 

राजा ने उस युवक से पूछा, “तुझे कैसे पता चला कि वह घोड़ा असली नहीं है?” उसने कहा, “घोड़े घास खाते हुए अपना मुँह ऊपर रखते हैं, किन्तु यह घोड़ा गाय के जैसे गर्दन झुका कर घास खाता है।”

 

जन्म घुट्टी का ध्यान नहीं रखा तो घोड़ा गाय बन सकता है, और मनुष्य पशु। मीडिया को अपने जीवन में घुसने देते हैं, वैसे-वैसे आपमें पशुता घर करती जाती है। आपको न तो अपनी चिन्ता है, न ही अपने सन्तानों की।

 

राजा उस युवक पर प्रसन्न हुआ और उसके घर अनाज, घी और पक्षियों का मांस भिजवाया। उसे नौकरी में भी बढ़ती दी और रानीवास की देखभाल हेतु भेजा। कुछ दिनों बाद राजा ने उससे रानी के बारे में पूछा, तो वह बोला, “उनका रहन-सहन तो राजकुमारी जैसा है, किन्तु वे यथार्थ में राजकुमारी नहीं हैं।”

 

सुनकर राजा तो स्तब्ध रह गया, तुरन्त ही सास को बुलाकर पूछताछ की, तो उन्होंने कहा, “मेरे यहाँ जब बेटी हुई तो तुरन्त ही आपके साथ उसकी सगाई करना निश्चित हो गया था, किन्तु दुर्भाग्य से छः महीने में ही उसकी मृत्यु हो गई। इसलिए हमने दूसरे की पुत्री को गोद लिया, वही कन्या आपकी रानी है।”

 

राजा ने युवक से पूछा, “तुझे कैसे पता चला?” तो युवक ने कहा, “ऊँचे खानदान के लोग अन्य लोगों से बहुत अच्छे से एवं नम्र व्यवहार करते हैं, यह बात मुझे आपकी रानी में नज़र नहीं आई।” राजा ने खुश होकर उस युवक के घर अनाज, भेड़ और बकरियाँ भेजीं, और उसे राज दरबार में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया।

 

                खानदानी और इमेंसिटी वाले गुण तो बाजार में मिलते हैं, स्कूलकॉलेज में और ही कोई लेबोरटरी में, ये गुण या तो जन्मजात होते हैं, या कभी नहीं मिलते। ऐसे गुण प्राप्त होने का बाद उन्हें खोना पड़े, यह इस संसार में सबसे बड़ा नुकसान है

 

राजा ने एक बार उस युवक से अपने बारे में पूछा, तो युवक ने पहले अभयदान माँगा, फिर बोला, “न तो आप राजा हैं, न ही आपके लक्षण राजा जैसे हैं।”

 

क्रोधित होकर राजा अपने पिता के पास गया, तो पिता बोले, “मैं निःसन्तान था, इसलिए मैंने तुझे एक कसाई से गोद लिया था।” राजा ने उस युवक से पूछा, “तुझे कैसे पता चला कि मैं राज्यवंश का नहीं हूँ।” तो युवक ने कहा, “जब कोई राजा खुश होता है, तो इनाम में हीरे, मोती, जवाहरात आदि देता है, किन्तु आपने हमेशा मुझे अनाज, भेड़-बकरी और मांस दिया, यह व्यवहार तो कसाई करता है, यहीं से मुझे अंदेशा हुआ की आप असली राजवंश के नहीं हैं।”

 

जो मूल रूप से कसाई है, और कसाई जैसा व्यवहारवर्तन करे, यह दुःख की बात नहीं है; किन्तु जो मूल रूप से खानदानी हो, किन्तु स्कूल, कॉलेज, कुसंग, कुदृश्य, कुश्रवण और कुसाहित्य के प्रभाव में आकर नीच कुल जैसा शिथिल चारित्री बन जाए, भोगउपभोग में एकदम निकृष्ट स्तर पर पहुँच जाए, यह अधिक दुःखदायी है

 

इमेंसिटी का अर्थ है, खानदानी। ऐसी कोई बात जिससे आपकी या आपके परिवार की शोभा दूषित हो, वही आपकी और आपके परिवार की एक्चुअल डेथ है। इससे तो 100 फीट दूरी रखना ही हितावह है।

 

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जिन्होंने अनेक धर्म-सम्प्रदायों के ग्रन्थ एवं पुस्तकों का गहन अध्ययन किया, और वर्तमान के विद्वानों में जो पहली पंक्ति में बैठते, ऐसे तीव्र मेधावी मुनिवर की विविध विषयों की यह लेखमाला मात्र प्रौढ़ या प्रबुद्ध वर्ग को ही नहीं बल्कि युवाओं को भी आकर्षित करेगी।Life को Change करने वाले लेख जीवन को नई दिशा देंगे।

1 Comment

  • Pragnesh
    July 2, 2020

    Thanks for sharing this with us

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