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Secret of Work

“सहसा न विदधीत क्रियाम्, अविवेकः परमापदां पदम् ।

 

वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्घा: स्वयमेव सम्पद:।।”

 

 

छगन : अरे मगन! तुम क्या करते हो?

 

मगन : मैं कुछ भी नहीं करता, सिर्फ सोचता रहता हूँ। और छगन! तू क्या करता है?

 

छगन : मैं ज्यादा सोचता नहीं, सिर्फ काम करता हूँ।

 

दुनिया में तरह-तरह के लोग हैं। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो सिर्फ सोचते रहते हैं। कुछ खास काम नहीं करते। कमज़ोर, कामचोर, नकारात्मक सोच में अपने दिन, महीने, साल गुजार देते हैं। कुछ खास काम नहीं कर पाते, जिंदगी में सफलता प्राप्त नहीं कर सकते, सिर्फ एक Routine Life जीते हैं, वह भी मुश्किलों से भरी, ऐसे लोगों को निष्क्रिय ही कह सकते हैं।

 

बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जो कार्य तो बहुत करते हैं या करते होंगे, पर योग्य सोच के बगैर। ऐसे लोग कार्य के बारे में जल्दी निर्णय लेकर, आगे बढ़ते होंगे। उनके पास Short Thinking होती है। ऐसे लोग कईं प्रकार के नुकसान करते हैं और पछतावा करते हैं। इसलिए हम यह अनुमान कर सकते हैं कि जो नुकसान निष्क्रिय लोग करते हैं उससे अधिक नुकसान ऐसे सक्रिय लोगों का होता है।

 

एक किसान ने एक नेवला पाल रखा था। वह बहुत ही चतुर था और मालिक का वफादार था। एक दिन वह किसान कहीं बाहर गया हुआ था। किसान की पत्नी अपने छोटे बच्चे को उसके भरोसे छोड़कर कुएं से पानी भरने गई।

 

अब हुआ ये कि, उसकी पत्नी के जाने के बाद एक काला नाग सर-सर करते हुए आ रहा था। उस नेवले की नज़र जैसे ही नाग पर पड़ी, वह उस पर टूट पड़ा। उसने नाग के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

 

किसान की पत्नी जब पानी भर के वापस आयी, तो उसने नेवले के मुँह में नाग के टुकड़े देखें। उसे गलतफहमी हुई, उसे लगा कि उसकी गैरहाजरी में नेवले ने उसके बच्चे को मार दिया है। दुःख और क्रोध से भरी उस स्त्री ने नेवले के ऊपर पानी से भरा घड़ा फेंक दिया, वह मर गया। लेकिन जब वह घर के अंदर दौड़ कर गई तो देखा बच्चा तो शांति से सो रहा है, पर उसके पास एक मरे हुए काले नाग के टुकड़े पड़े हैं, किसान की पत्नी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसके बाद वह नेवले के पास आयी, अपनी गोद में लिया और जोरों से रोने लगी। पर अब पछताने से क्या होता? इसलिए कहा गया है,

 

 

“वगर विचारे जे करे, ते पाछळ पछताय; 

 

काम बगाडे़ आपणु, जगमां मूर्ख कहेवाय”

 

 

यह  Short Thinking = अविवेक  Future में बहुत सारी आपत्ति का कारण बनता है।

 

वर्तमान समय में यह Short Thinking = अविवेक, बहुत से लोगों की प्रवृत्ति में दिखाई देता है, जैसे कि,

 

  • पैसे कमाने के लिए सट्टा वगैरह अनुचित उपाय करना

 

  • अधिक सामाजिक, पारिवारिक Problems होने के कारण Suicide करना

 

  • प्रेम में Other caste Marriage करना, etc.

 

ऐसी बहुत सी प्रवृत्तियों के कारण भविष्य में दुःख मिलता है, पछतावा करना पड़ता है।

 

प्रस्तुत में सुभाषितकार में कोई भी कार्य करने के लिए Best Secrets बताया गया है कि,

 

“कोई भी कार्य करने से पहले पूरी तरह से विचार करो”

 

वर्तमान स्थिति में लोग Short Thinking से कार्य करते है।

 

Perfect Thinking यह है कि First and Must पर कार्य करो।

 

Result को नज़र के सामने रख कर करो। स्व और पर के हित का विचार करो।

 

कोई भी कार्य करने के लिए तीन बातों को ध्यान में रखो 

 

1) दूर की सोच रखो, छोटी सोच से विचार मत करो।

 

2) कार्य का परिणाम क्या मिलेगा इसका विचार करो।

 

3) स्व और पर का नुकसान तो नहीं हो रहा है? स्व-पर के चित्त का विचार करो।

 

प्रस्तुत सुभाषितकार हमें एक दूसरी अच्छी बात बता रहे हैं, संपत्ति के Nature की पहचान दे रहे है। संपत्ति गुण की लालची है, गुणवान व्यक्ति के पास संपत्ति सामने से दौड़ कर आती है। दुनिया के सामान्य लोक संपत्ति को Like करते हैं, लेकिन संपत्ति तो Perfect Thinking से काम करते हुए असामान्य व्यक्ति को Like करती है।

 

 

!! “Every thought that we think is creating our future” !!

About the Author /

authors@faithbook.in

प्राचीन साहित्यों में तीन चीजों को रत्न की उपमा दी गई है, जल, अन्न और सुभाषित। इनमें से सुभाषित रत्न का जगमगाता प्रकाश पू. मुनि भगवन्त हमारे समक्ष लेखमाला के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। संस्कृत से संस्कृति का सन्देश देने वाला यह लेख युवावर्ग बड़े चाव से पढ़ेगा।

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